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मांसपेशियों की दवा की खोज पर असंवेदनशील रवैया अपनाने पर केंद्र को फटकार
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने मांसपेशियों से संबंधित बीमारी की खोज पर असंवेदनशील रवैया अपनाने पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि इंडियन एसोसिएशन फॉर द कलटीवेशन ऑफ साइंस -आईएसीएस द्वारा इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखने के बावजूद सरकार ने इस दिशा में कुछ नहीं किया।
अदालत ने केंद्र सरकार को बीमारियों पर खोज करने वाले तीन सरकारी संगठनों से बात कर अपनी स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति प्रतिभा मनिंदर सिंह ने उक्त बीमारी से पीड़ित चार वर्षीय अभिराज गर्ग द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने मामले की सुनवाई 2 मार्च के लिए स्थगित कर दी है।
याची की ओर से पेश अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि मांसपेशियों जैसी बीमारी के इलाज के लिए तीन संस्थाओं ने कई तरह की दवाएं खोजी हैं। उन्हें वित्तीय सहायता एवं क्लीनिकल ट्रायल की जरूरत है।
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उन्होंने इसके लिए सरकार से अनुमति मांगी और सहायता देने का आग्रह किया। आईएसीएस ने प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा। इसके बावजूद सरकार का कोई जवाब नहीं आया।
उन्होंने कहा कि देश में लगभग 136.64 करोड़ लोग मांसपेशियों की बीमारी से जूझ रहे हैं। जिसमें से 21 फीसदी लोगों का इलाज खोज की गई दवाओं से हो सकता है। बीमारी से जूझ रहे लगभग 26.62 फीसदी मरीज 14 वर्ष तक के बच्चे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की तीन संस्थाओं ने 13 वर्षों की खोज के बाद कुछ दवाओं की खोज की है जो काफी प्रभावी है। इससे लगभग 10 हजार लोगों की बीमारी ठीक की जा सकती है। इसलिए सरकार से इस मुद्दे पर ध्यान देने को कहा जाए। उन्होंने कहा कि अभी तक दवा अमेरिका से आ रही है जिस पर प्रति वर्ष 600 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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अदालत ने केंद्र सरकार को बीमारियों पर खोज करने वाले तीन सरकारी संगठनों से बात कर अपनी स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति प्रतिभा मनिंदर सिंह ने उक्त बीमारी से पीड़ित चार वर्षीय अभिराज गर्ग द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने मामले की सुनवाई 2 मार्च के लिए स्थगित कर दी है।
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याची की ओर से पेश अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि मांसपेशियों जैसी बीमारी के इलाज के लिए तीन संस्थाओं ने कई तरह की दवाएं खोजी हैं। उन्हें वित्तीय सहायता एवं क्लीनिकल ट्रायल की जरूरत है।
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उन्होंने इसके लिए सरकार से अनुमति मांगी और सहायता देने का आग्रह किया। आईएसीएस ने प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा। इसके बावजूद सरकार का कोई जवाब नहीं आया।
उन्होंने कहा कि देश में लगभग 136.64 करोड़ लोग मांसपेशियों की बीमारी से जूझ रहे हैं। जिसमें से 21 फीसदी लोगों का इलाज खोज की गई दवाओं से हो सकता है। बीमारी से जूझ रहे लगभग 26.62 फीसदी मरीज 14 वर्ष तक के बच्चे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की तीन संस्थाओं ने 13 वर्षों की खोज के बाद कुछ दवाओं की खोज की है जो काफी प्रभावी है। इससे लगभग 10 हजार लोगों की बीमारी ठीक की जा सकती है। इसलिए सरकार से इस मुद्दे पर ध्यान देने को कहा जाए। उन्होंने कहा कि अभी तक दवा अमेरिका से आ रही है जिस पर प्रति वर्ष 600 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं।