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आरएमएल की इमरजेंसी में आग, 200 मरीजों को सुरक्षित निकाला

Sun, 23 Jun 2019 05:46 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Sun, 23 Jun 2019 05:46 AM IST
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Fire in Ram Manohar Lohiya Hospital
आरएमएल अस्पताल में शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थी आग। - फोटो : Ashram

डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) की इमरजेंसी में शनिवार तड़के 4.15 बजे आग लग गई। हादसे के दौरान इमरजेंसी में करीब 200 मरीज भर्ती थे। मरीजों को तत्काल सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

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हालांकि आग के चलते इमरजेंसी में धुआं भरने से अफरातफरी का माहौल रहा। 5.15 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया। आग शॉर्ट सर्किट की वजह से इलेक्ट्रिक पैनल में लगी थी। हालांकि स्पष्ट कारणों को जानने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने कमेेटी गठित की है, जोकि एक हफ्ते में रिपोर्ट देगी।
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अस्पताल की इमरजेंसी के भूतल के पीछे वाले कमरे में इलेक्ट्रिक पैनल रखा था, जिसमें 4.15 बजे आग लगी। अस्पताल प्रबंधन ने आग की सूचना दमकल विभाग को दी। इमरजेंसी में भर्ती 200 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती थी, हालांकि दमकल और अस्पताल के स्टाफ ने मिलकर सभी मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालते हुए अन्य कमरों में शिफ्ट किया। दमकल की पांच गाड़ियों ने 5.15 बजे तक आग पर काबू पा लिया।
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अस्पताल की इमरजेंसी में मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि नीचे वाले लोग तो पहले ही बाहर निकल गए थे, लेकिन अंधेरे में वे वहीं मौजूद थे। तेजी से धुआं ऊपर भी आने लगा तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें तुरंत बाहर निकलने के लिए कहा। इस दौरान पीछे से निकलने के सभी दरवाजे खोल दिए गए, ताकि लोग बाहर निकल सकें और धुआं न फैल जाए।

लोगों में दहशत फैल गई और सब एक साथ सीढ़ियों के रास्ते से नीचे की ओर भागने लगे। कुछ परिजन अपने-अपने मरीजों को गोद में उठाकर नीचे की ओर दौड़ रहे थे, तो कुछ मरीज वहीं लेटे रहे। इस दौरान पूरे इमरजेंसी वार्ड में अंधेरा था। लोगों ने अपने फोन की टॉर्च जलाकर अपना-अपना रास्ता बनाया। अंधेरे में सीढ़ियों के पास भगदड़ सी मच गई।

हो सकता था बड़ा हादसा


अस्पताल की इमरजेंसी के इलेक्ट्रिक पैनल में लगी आग अगर कमरे से निकलकर बाहर तक फैलने लगती तो बड़ा हादसा हो सकता था। इमरजेंसी के प्रथम तल पर 200 मरीज भर्ती थे। इन मरीजों के लिए बाहर निकलने को जो रास्ता था, वह आग वाले कमरे से जुड़ी गैलरी से ही जाता है।

अगर धुआं ज्यादा फैल जाता तो मरीजों के लिए गैलरी से निकलते समय देखना और सांस लेना मुश्किल हो जाता। 4.30 बजे के समय अस्पताल में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती भी बहुत कम होती है। ऐसे में मरीजों को जल्दी बाहर नहीं निकाला जा सकता था। इमरजेंसी में ऑक्सीजन सिलेंडर, कई ज्वलनशील पदार्थ और दवाएं होती हैं। आग फैल जाती तो स्थिति भयानक हो सकती थी।

मरीजों को वापस शिफ्ट किया
अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. वीके तिवारी ने कहा कि स्थिति पर समय रहते काबू पा लिया गया। सुबह 11 बजे इमरजेंसी में बिजली आपूर्ति फिर से शुरू हो गई। दोपहर 12 बजे मरीजों को वापस इमरजेंसी शिफ्ट किया गया। देर शाम तक इमरजेंसी सेवाएं सुचारु रूप से चलीं, लेकिन इमरजेंसी के बाहर पंजीकरण के लिए बने कंप्यूटर सिस्टम तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी थी। इस दौरान मरीजों का पंजीकरण हाथ से लिखकर एक रजिस्टर में किया गया।

डॉ. हर्षवर्धन ने किया दौरा
आरएमएल में आग की सूचना से अस्पताल प्रबंधन ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य मंत्रालय भी हरकत में आ गया। शनिवार सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदान और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने डॉक्टरों से लेकर तीमारदारों से जानकारी ली। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और आपात सेवाओं सहित सभी सेवाएं सुचारु रूप से चल रही हैं।

लोकनायक अस्पताल में भी लगी आग
दिल्ली सरकार के लोकनायक अस्पताल में भी शुक्रवार रात करीब सवा 12 बजे आग लग गई थी। सूचना मिलने पर दमकल विभाग की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया। दमकल विभाग के मुताबिक, अस्पताल की छत पर तार में शॉर्ट सर्किट के चलते आग लगी थी। हालांकि मरीजों को कोई दिक्कत नहीं हुई।

अस्पतालों में पहले भी हुए हैं अग्निकांड
दिल्ली के अस्पतालों में पहले भी आग लगने की घटनाएं हुई हैं। इसी साल मार्च में एम्स के ट्रॉमा सेंटर में आग लगी थी। इस आग की वजह से प्रभावित दो ऑपरेशन थियेटर अभी तक शुरू नहीं हो सके हैं। इससे पहले एम्स के नर्सिंग कॉलेज में भीषण आग लगने से क्लासरूम जल गए थे। दिल्ली सरकार के दीपचंद बंधु अस्पताल, जीटीबी, अरुणा आसिफ अली और लोकनायक अस्पताल में बीते दो माह के दौरान आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं।

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