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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Swine flu can also affect the eyes.

Delhi NCR News: आंखों पर भी वार कर सकता है स्वाइन फ्लू

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2026 05:43 PM IST
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-एच1एन1 से पीड़ित कुछ मरीजों में आंखों के लाल होने, पानी आने, जलन और दर्द जैसी शिकायतें सामने आती हैं
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
स्वाइन फ्लू का नाम सुनते ही खांसी, जुकाम और तेज बुखार जैसे लक्षण जेहन में आते हैं, लेकिन यह संक्रमण आंखों को भी प्रभावित कर सकता है। एच1एन1 से पीड़ित कुछ मरीजों में आंखों के लाल होने, पानी आने, जलन और दर्द जैसी शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे में फ्लू के साथ आंखों में होने वाले बदलावों को महज सामान्य एलर्जी या थकान समझना भारी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हालांकि हर बार आंखों की परेशानी एच1एन1 के कारण नहीं होती, लेकिन तेज लालिमा, सूजन, दर्द या धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर से जांच और सही इलाज गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ मरीजों में इसके साथ आंखों में लालिमा, पानी आने और कंजंक्टिवाइटिस की समस्या भी हो सकती है। सफदरजंग अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉ. दीपक कुमार के अनुसार, मेडिकल स्टडीज में एच1एन1 से पीड़ित कुछ मरीजों में कंजंक्टिवाइटिस और आंखों से जुड़ी अन्य परेशानियां देखी गई हैं।

दर्द और धुंधला दिखे तो हो जाएं सावधान : इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉ. अरविंद अग्रवाल ने बताया कि स्वाइन फ्लू के मरीजों में आंखों से जुड़ी गंभीर समस्याएं दुर्लभ हैं, लेकिन कुछ मामलों में आंख के अंदर सूजन, रेटिना या ऑप्टिक नर्व से संबंधित परेशानी हो सकती है। अगर आंखों में ज्यादा लालिमा या सूजन के साथ तेज दर्द, धुंधला दिखाई देना, लगातार पानी आना, तेज सिरदर्द या लगातार तेज बुखार हो तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
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कैसे करें बचाव :
स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए हाथों को बार-बार साबुन से साफ करें।
खांसते और छींकते समय मुंह-नाक को ढकें और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें।
आंखों को बार-बार छूने या रगड़ने से भी बचना चाहिए।
तौलिया, रुमाल और अन्य निजी सामान किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा न करें।
आंखों में लालिमा या किसी अन्य परेशानी की स्थिति में बिना डॉक्टर की सलाह के कोई आई ड्रॉप या दवा इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए।
समय पर जांच और सही इलाज से ज्यादातर मरीज ठीक हो जाते हैं।
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