Budget : कामकाजी महिलाएं हुईं नाराज, उम्मीद पर खरा नहीं उतरा बजट
वित्त मंत्री ने यूं तो बजट में कई लुभावने वादे किए हैं लेकिन कामकाजी महिलाओं को बजट से निराशा हाथ लगी है। कामकाजी महिलाएं अपने लिए इस बजट को लुभावना नहीं मान रही हैं।
घरेलू व कामकाजी महिलाएं शिक्षा व स्वास्थ्य पर सेस लगने से घर के बजट में भी बढ़ोतरी मान रही हैं। शिक्षिका अंजलि वर्मा का कहना है कि महिला कर्मचारी को ईपीएफ में 12 फीसदी की जगह 8 फीसदी देना होगा।
यह सिर्फ नई महिला कर्मचारियों के लिए है, जो महिलाएं पहले से काम कर रही हैं उनका तो ध्यान ही नहीं रखा गया। टैक्स स्लैब में बदलाव कर कामकाजी महिलाओं को राहत दी जा सकती थी।
बेहतर बजट की उम्मीद थी। शिक्षा व स्वास्थ्य पर सेस लगने से घर के बजट पर भी असर पड़ेगा। प्रोफेसर डॉ. अमृता बजाज कहती हैं कि मुद्रा योजना के तहत महिलाओं को लोन देने की बात कही गई है इससे महिलाओं को नया काम शुरू करने में आसानी होगी, लेकिन टैक्स स्लैब में भी बदलाव किया जाना चाहिए था।
प्राइवेट सेक्टर की महिलाओं पर कुछ खास फोकस नहीं हुआ
नीलेश्वर बसक (इंटरनेशनल ग्रूमिंग विशेषज्ञ) का कहना है कि बजट से काफी उम्मीदें थी लेेकिन प्राइवेट सेक्टर की महिलाओं पर कुछ खास फोकस नहीं किया गया। सरकारी व नई कामकाजी महिलाओं पर ही ध्यान दिया गया है।
महिलाओं के लिए लुभावने बजट की उम्मीद थी। ईवेंट मैनेजर तब्बुसुम जैन कहती हैं कि बजट में महिला उद्यमियों का ध्यान नहीं रखा गया है। उन्हें राहत मिलनी चाहिए थी।
सभी वर्ग की महिलाओं की जगह एक खास वर्ग की महिलाओं का ध्यान बजट में रखा गया है। मॉडल रिया कहती हैं कि यदि सरकारी कामकाजी महिलाओं के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर की महिलाओं का भी ध्यान रखा जाता तो बेहतर होता। बजट से काफी उम्मीद थी लेकिन महिलाओं के लिए टैक्स में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है।