फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   woman's petition regarding interim alimony was heard in the Delhi High Court

Delhi High Court: 'पढ़ी-लिखी हो, खुद कमाओ...', अंतरिम गुजारा भत्ता मांगने पर महिला को दिल्ली हाईकोर्ट की नसीहत

Thu, 20 Mar 2025 09:25 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 20 Mar 2025 09:25 PM IST
सार

महिला को राहत देने से इन्कार करते हुए कोर्ट ने कहा कि वह यह समझने में असमर्थ है कि सक्षम और अच्छी योग्यता होने के बावजूद उसने भारत लौटने के बाद से निष्क्रिय बैठे रहना क्यों चुना। महिला के पास ऑस्ट्रेलिया से मास्टर डिग्री है और वह अपनी शादी से पहले दुबई में अच्छी कमाई कर रही थी।

विज्ञापन
woman's petition regarding interim alimony was heard in the Delhi High Court
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई महिला पढ़ी-लिखी है और अपने पैरों पर खड़े होने में सक्षम है तो उसे अंतरिम गुजारा भत्ता की मांग नहीं करनी चाहिए। बल्कि खुद कमाने के रास्ते खोजने चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महिला की याचिका पर सुनवाई करने के दौरान यह भी कहा कि कानून निष्क्रियता को बढ़ावा नहीं देता।

विज्ञापन


जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पत्नी, बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण का आदेश दिए जाने के प्रावधान के पीछे असल मकसद पति-पत्नी के बीच समानता बनाए रखने संबंधित लोगों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यदि कोई महिला सक्षम है तो भी वह हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा, इस मामले में अंतरिम भरण-पोषण को हतोत्साहित किया जा रहा क्योंकि अदालत याचिकाकर्ता में कमाने और अपनी शिक्षा का लाभ उठाने की क्षमता देख सकती है। महिला ने अपनी याचिका में दावा किया था कि निचली अदालत ने भरण-पोषण के लिए उसकी याचिका खारिज करके गलती की है, क्योंकि वह बेरोजगार है और उसके पास आय का कोई ठोस साधन नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


योग्यता के बावजूद काम न करने पर उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान उसके पति की तरफ से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि यह कानून का दुरुपयोग है, क्योंकि महिला उच्च शिक्षित है और कमाने में सक्षम है। वह महिला केवल बेरोजगारी के आधार पर भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती। महिला को राहत देने से इन्कार करते हुए कोर्ट ने कहा कि वह यह समझने में असमर्थ है कि सक्षम और अच्छी योग्यता होने के बावजूद उसने भारत लौटने के बाद से निष्क्रिय बैठे रहना क्यों चुना। महिला के पास ऑस्ट्रेलिया से मास्टर डिग्री है और वह अपनी शादी से पहले दुबई में अच्छी कमाई कर रही थी।


ट्रायल कोर्ट ठुकरा चुकी है मांग
उक्त मामले में दंपति की शादी दिसंबर 2019 में हुई और वे सिंगापुर चले गए। महिला का आरोप है कि पति और उसके परिवार के दुर्व्यवहार से तंग आकर फरवरी 2021 में वह भारत लौट आई। आर्थिक तंगी के कारण उसे अपने गहने तक बेचने पड़े। जून 2021 में उसने अपने पति से गुजाराभत्ता दिलाने की मांग करते हुए याचिका दायर की, जिसे ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद वह हाईकोर्ट पहुंची।

यह भी पढ़ें: Delhi: 'अधिकारी विधायकों के फोन कॉल या मैसेज का जवाब नहीं देते', विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed