'क्यों न शराब की बोतल पर भी स्वास्थ्य चेतावनी बड़े साइज में लिखी जाए'
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शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बावजूद इसके केंद्र व दिल्ली सरकार आम लोगों को इसके हानिकारक पहलुओं से अवगत करवाने की दिशा में कुछ नहीं कर रही।
यह आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न शराब की बोतल पर सिगरेट के पैकेट की तरह बड़े साइज में चेतावनी लिखने का निर्देश दिया जाए।
कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
इसके अलावा शराब के हानिकारक प्रभाव को बताने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की दिशा में क्या किया जा रहा है। अदालत ने मामले की सुनवाई 7 दिसंबर तय की है।
यह जनहित याचिका वेदपाल व अभिषेक दत्त ने दायर की है। याची के अनुसार दिल्ली सरकार को प्रति वर्ष आबकारी शुल्क के रूप में हजारों करोड़ रुपये की आय हो रही है जबकि जागरूकता अभियान पर मात्र कुछ करोड़ रुपये ही खर्च हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को शराब की बिक्री से शुल्क के रूप में वर्ष 2011 में 19,417.05 लाख, वर्ष 2014 में 29,690.60 लाख और वर्ष 2015 में 31,200.61 लाख रुपये की आय हुई। वहीं आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार ने जागरूकता अभियान पर कुछ ही करोड़ रुपये खर्च किए।