पढ़िए, सुपरटेक के बवाल की पूरी दास्तां
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सुपरटेक के नोएडा में दो टावर गिराने संबंधी इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश ने हड़कंप मचा दिया है। सेक्टर 93-ए स्थित एमरॉल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के दोनों टावरों में करीब 905 फ्लैट हैं।
इस मामले में कंपनी ने कानून उपाय तलाशने शुरू कर दिए हैं। सुपरटेक के सीएमडी आरके अरोड़ा का कहना है कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर स्थित प्रोजेक्ट के दो टावरों को गिराने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश उन्हें अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है।
अगर इस तरह का कोई आदेश मिलता है, तो कंपनी उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। अरोड़ा का दावा है कि इस प्रोजेक्ट में हो रहा निर्माण वैध है और नोएडा अथॉरिटी से स्वीकृत है।
37-37 फ्लोर के हैं दोनों टॉवर
कंपनी का कहना है कि ये दोनों टावर 37-37 फ्लोर के हैं। इनमें से एपेक्स टावर में 32 फ्लोर और सियाने टॉवर में 30 फ्लोर का निर्माण पूरा हो चुका है।
अवैध निर्माण से जुड़े इस मामले में टॉवर गिराने के अलावा कंपनी पर निवेशकों को पैसा 14 फीसदी ब्याज सहित लौटाने और कानून कार्रवाई की तलवार भी लटक रही है।
हाईकोर्ट ने यह फैसला इमरल्ड कोर्ट ओनर रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए दिया। साथ ही अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार कंपनी और नोएडा अथॉरिटी के अफसरों पर मुकदमा दर्ज करने का भी आदेश दिया है।
आमिर खान से भी मांगी थी मदद
सुपरटेक के एमरॉल्ड कोर्ट के निवासी कोर्ट जाने से पहले अपनी परेशानी को हर मंच पर उठाने की कोशिश कर चुके थे। हर जगह से निराशा हाथ लगने के बाद कोर्ट की शरण ली।
यहां की आरडब्ल्यूए की तरफ से याचिकाकर्ता आरपी टंडन ने बताया कि एपेक्स और सियाने टावर का निर्माण शुरू करते ही निवासियों ने विरोध शुरू कर दिया। सबसे पहले नोएडा प्राधिकरण से इस निर्माण को रोकने के लिए गुहार लगाई, मगर प्राधिकरण ने नहीं सुनी।
उसके बाद प्रदेश सरकार के आवास एवं शहरी विकास मंत्री आजम खां को भी पत्र लिखा। वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला। यहां तक कि अभिनेता आमिर खान से संपर्क साधा गया। उनसे सत्यमेव जयते प्रोग्राम में निवासियों की समस्या को उठाने की अपील की, मगर वहां से भी निराशा ही हाथ लगी थी।
ये है विवाद की मुख्य जड़
सुपरटेक के ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट एमरॉल्ड कोर्ट के जिन दो टावरों को गिराने के लिए हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया है, उसकी शुरुआत वाहनों की पार्किंग और सर्वेंट क्वार्टर को लेकर हुई थी।
दरअसल, सुपरटेक ने 2005 में सेक्टर 93ए में एमराल्ड कोर्ट लॉन्च किया। 17 हजार वर्ग मीटर में प्रोजेक्ट बना है। इसकी लागत 750 करोड़ रुपये है। प्रोजेक्ट के 660 फ्लैटों की बुकिंग 2006 में की गई। 2008 के बाद पजेशन देना शुरू किया। ये सभी तीन से चार बीएचके फ्लैट हैं। उस समय इनकी कीमत 70 से 80 लाख रुपये थी।
बिल्डर ने सर्वेंट क्वार्टर बनाने की बात कहकर सभी फ्लैट खरीदारों से पैसे भी जमा करवा लिए, मगर सर्वेंट क्वार्टर नहीं बनाए। इसकी जगह पार्किंग और ग्रीनरी एरिया को कम करके फ्लैट बनाने लगे। लोगों ने इस पर सवाल उठाया तो बिल्डर ने कोई सटीक जवाब नहीं दिया। मजबूरन 2012 में कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर अब कोर्ट ने आदेश जारी किया है।
पांच सौ फ्लैट खरीदारों की बढ़ी मुश्किल
हाईकोर्ट ने जिन दो टावरों को गिराने का आदेश दिया है, उनमें पांच सौ से अधिक फ्लैट बिक चुके हैं। इससे इनके खरीदारों की परेशानी बढ़ गई है। इन फ्लैटों की कीमत 40 लाख से एक करोड़ रुपये तक बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक कुल प्रस्तावित फ्लैटों में से करीब पांच सौ फ्लैट बिक चुके हैं। कुल 38 मंजिल बनने हैं, जिसमें से अब तक 30 मंजिल तक निर्माण भी हो चुका है। इसके बाद फिनिशिंग का काम होना है। कुछ ही महीनों में पजेशन मिलना शुरू हो जाता।
कोर्ट के आदेश के बाद अब इनके खरीदारों के लिए परेशानी बढ़ गई है। जिन लोगों ने यहां आवास का सपना संजोया है, उनके लिए यह सपना टूटने जैसा है। हालांकि कोर्ट ने इन फ्लैटों में पैसा लगा चुके खरीदार को 14 प्रतिशत ब्याज के हिसाब से पैसे वापस करने का भी बिल्डर को आदेश दिया है।