...जब सामान्य वर्ग का कटऑफ हुआ ओबीसी से भी कम
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उत्तर प्रदेश के होम्योपैथी चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति में सामान्य वर्ग का कटऑफ ओबीसी श्रेणी के कटऑफ से दस फीसदी कम पाया गया। सुनने में भले ही यह अटपटा लगे, लेकिन सच है। इस अभूतपूर्व स्थिति से निपटने को लोकसेवा आयोग ने ओबीसी श्रेणी में एक सीट के लिए 12 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया। अब इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी है।
जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की पीठ ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के फैसले को सही करार देते हुए 177 लोगों को जल्द नौकरी देने का आदेश दिया है। पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को भी दरकिनार कर दिया, जिसमें आयोग को ओबीसी कटऑफ कम करने का निर्देश दिया गया था।
बुधवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस ललित ने आयोग के अधिकारियों से पूछा, जब सामान्य वर्ग में लोगों को साक्षात्कार के लिए बुलाने का अनुपात 1:3 (एक सीट पर तीन अभ्यर्थी) था, तो ओबीसी के लिए 1:12 क्यों था? अधिकारियों ने पीठ को बताया कि 2014 में 177 होम्योपैथी चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती के लिए आवेदन मंगाए गए थे।
इनमें सामान्य वर्ग की 113 सीटें, जबकि 23 सीटें ओबीसी और बाकी एससी-एसटी वर्ग के लिए थीं। 150 अंकों की स्क्रीनिंग परीक्षा में ओबीसी का कटऑफ 99 मार्क्स था, जबकि सामान्य वर्ग का कटऑफ 86 मार्क्स था। हालांकि इसके बाद आयोग ने आरक्षित वर्ग का कटऑफ भी 86 कर दिया था। लेवल प्लेइंग फील्ड को ध्यान में रखते हुए आरक्षित वर्ग का अनुपात 1:12 और सामान्य वर्ग के लिए 1:2 रखा गया था।
दिया नियम का हवाला
पीठ ने अधिकारियों से सवाल किया आखिर आपने किस नियम के तहत एक सीट के लिए 12 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया। इस पर अधिकारियों ने वर्ष 2004 के एक नियम का हवाला दिया। अधिकारियों के पक्ष से संतुष्ट पीठ ने कहा कि साक्षात्कार के लिए सीट से करीब तीन गुना अभ्यर्थियों को बुलाने की परंपरा है लेकिन आयोग इसमें कम या ज्यादा करने के लिए स्वतंत्र है। पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले के देखते हुए आयोग द्वारा लिया गया फैसला पूरी तरह से वैध है। आयोग की ओर से वकील शिरीष कुमार मिश्रा जबकि यूपी सरकार की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन पेश हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को लगाई थी नियुक्ति पर रोक
बीते 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को परीक्षा का रिजल्ट घोषित करने की इजाजत तो दे दी थी लेकिन नियुक्तियां करने पर रोक लगा दी थी। बुधवार को पीठ ने आयोग को नियुक्ति के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है और राज्य सरकार को जल्द सभी को नियुक्त करने का आदेश दिया है।