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जज्बे को सलामः पीपीई किट पहन दुनिया को भूल फर्ज निभाने वाले योद्धा

Wed, 29 Jul 2020 12:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा धनंजय चौहान, फरीदाबाद
धनंजय चौहान, फरीदाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 29 Jul 2020 12:53 AM IST
सार

  • जज्बा : इलाज में डूबे डॉ. प्रनीत अंसल आठ घंटे पानी तक नहीं पीते और न ही जाते शौच

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corona warrior story Warriors who forget the world wearing PPE kits
लड़ेंगे कोरोना से - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फेसबुक के साथ अमर उजाला ने कोरोना सेनानियों के जज्बे और जुनून पर यह श्रृंखला शुरू की है। इसके तहत आपको साहसी कोरोना सेनानियों की कथाएं नियमित रूप से पढ़ने को मिलेंगी।

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कोरोना संक्रमण से जंग जीतकर लोग अपने घरों को लौट रहे हैं तो इसके पीछे डॉक्टरों की मेहनत, त्याग और जज्बा भी है। ऐसे ही चिकित्सक हैं डॉ. प्रनीत अंसल। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट डॉ. अंसल पिछले पांच माह से लगातार आठ-आठ घंटे आईसीयू में ड्यूटी कर रहे हैं। उनके इलाज और  काउंसलिंग से 15 कोरोना मरीज ठीक होकर अब सामान्य जीवन जीने लगे हैं।
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रांची के रहने वाले डॉ. प्रनीत ने मार्च में ही ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ज्वाइन किया है। मार्च-अप्रैल में जब वायरस का प्रभाव कम था और ईएसआईसी को कोविड अस्पताल घोषित नहीं किया गया था, तब वह ओपीडी में कोरोना मरीजों को देखते थे। इसके बाद आईसीयू में ड्यूटी देने लगे। इस दौरान संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा रहता था, क्योंकि ओपीडी में जांच के लिए आने वाले मरीजों में यह नहीं पता चलता था कि कौन  संक्रमित है और कौन नहीं। तब पीपीई किट भी नहीं मिलती थी। कोविड अस्पताल घोषित होने के बाद काम आसान हुआ।
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इलाज के दौरान दिक्कतों के बारे में वह कहते हैं कि आईसीयू में घुसने से पहले सभी डॉक्टरों को पीपीई किट पहननी पड़ती हैं। किट पहनने के बाद चश्मा पहनने में भी दिक्कत हुई, उमस के कारण चश्मे से साफ दिखता नहीं है और न पहनें तो सिर में दर्द होने लगता है। सबसे बड़ी बात ये है कि आईसीयू में जाने से पहले जो भी खाना पीना होता है वह पीपीई किट पहनने से पहले ही खा लेना पड़ता है। इसके बाद शौच तक नहीं जा सकते।

कोरोना के खात्मे तक शांत नहीं बैठूंगा
डॉ. प्रनीत की हाल ही में शादी हुई है। पत्नी डॉ. सुप्रीत सोनाली भी रांची के अस्पताल में कोविड ड्यूटी में तैनात हैं। पिता अनुज और मां कंचन घर पर ही रहते हैं। ऐसे में माता-पिता और पत्नी से केवल वीडियो कॉल पर ही बात होती है। कहते हैं-बढ़ते संक्रमण के कारण परिजनों को काफी चिंता भी होती है, मगर मेरे लिए घर से पहले ड्यूटी है। ये मेरा धर्म है। इसलिए जब तक कोरोना को हरा नहीं दूगां तब तक शांत नहीं बैठूंगा।


कई बार लगता बेहद डर
डॉ. प्रनीत ने बताया कि दो तीन माह पहले आईसीयू में बुजुर्ग मरीजों की संख्या ज्यादा थी। मगर एक-दो महीने से युवा मरीज भी भर्ती हो रहे हैं। उन्हें देखकर बेहद डर लगता है कि कहीं मैं भी कोरोना की चपेट में न आ जाऊं। हालांकि अभी तक तीन बार कोविड टेस्ट करवाया और रिपोर्ट निगेटिव आई है।

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