{"_id":"e55b52fd81f05e1b93e440313c98dfbf","slug":"villagers-gives-ultimatum-to-administration","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रशासन के खिलाफ महापंचायत, दिया अल्टीमेटम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रशासन के खिलाफ महापंचायत, दिया अल्टीमेटम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sun, 25 May 2014 11:23 PM IST
विज्ञापन
गुड़गांव के नाथूपुर गांव में नगर निगम की ओर से हुई तोड़फोड़ के विरोध में रविवार को महापंचायत हुई। इस दौरान मामले की पैरवी के लिए 31 सदस्यीय हाईपावर कमेटी गठित की गई। उसने प्रशासन को मंगलवार की शाम तक का समय दिया है।
विज्ञापन
नाथूपुर गांव में चार दिन पहले झुग्गी में लगी आग को बुझाने के दौरान नगर निगम की ओर से तोड़फोड़ कराई गई थी। इसके बाद से ग्रामीणों का विरोध बढ़ता जा रहा है।
विज्ञापन
रविवार को हुई महापंचायत में सभी पार्टियों के राजनेता, सामाजिक संगठन और ग्रामीण एकत्र हुए। इस दौरान निगमायुक्त की ओर से की गई तोड़फोड़ का एक सुर में विरोध करते हुए घटना की निंदा की गई।
विज्ञापन
लोगों ने सर्वसम्मति से अनंतराम तंवर को महापंचायत का अध्यक्ष बनाया। उनके नेतृत्व में तीस सदस्यीय टीम का गठन किया गया, जो मामले की पैरवी करेगी। महापंचायत में मुख्य रूप से दो मांगों का समर्थन किया गया।
इसमें अवैध ढंग से तोड़े गए मकान के मुआवजा की मांग की गई और कहा गया कि निगम के दायरे में आने वाले गांवों में तोड़फोड़ नहीं करने दिया जाएगा। लोगों ने इसका पूरा समर्थन किया। इनेलो नेता गोपीचंद गहलोत ने तोड़फोड़ को अवैध करार दिया।
गुड़गांव सिटीजंस काउंसिल के प्रधान आरएस राठी ने कहा कि आयुक्त ने पूरे शहर में उत्पात मचाया हुआ है। अभी कुछ दिन पूर्व ही सदर बाजार में रात 11 बजे जेसीबी, बुलडोजर लेकर दुकानें तोड़नी शुरू कर दीं। इसे लेकर जल्द ही डीसी व निगम कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन कर ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।
उसके निर्णय के लिए 31 सदस्य कमेटी का भी गठन कर लिया गया है। जो 27 मई को होने वाली आगामी बैठक में इस पर निर्णय लेगी।
कागजों में जमीन डीएलएफ की
गुड़गांव के नगर निगम ने चार दिन पहले नाथूपुर गांव की जिस जमीन पर तोड़फोड़ की, वह जमीन डीएलएफ के खाते में है। ऐसे में विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। नाथूपुर गांव में हुई महापंचायत के बाद पीड़ित परिवारवालों ने कुछ कागज पुलिस को उपलब्ध कराए हैं।
जिससे जाहिर होता है कि जिस जमीन पर कार्रवाई की गई वह डीएलएफ की है। राजस्व आंकड़े के अनुसार डीएलएफ ने अपनी आवश्यकता के अनुसार 68 हजार 62 वर्ग गज जमीन गांववालों की 61 हजार 257 वर्ग गज से बदली है। डीएलएफ को गांववालों से अभी भी सात हजार वर्ग गज से अधिक जमीन की आवश्यकता है।
नाथूपुर के रहने वाले सतबीर ने अपनी जमीन को दादा लाई जमीन बताया है। इसका क्षेत्रफल सात हजार वर्ग गज से अधिक है। जिसमें दो सौ गज जमीन पर एक करोड़ बीस लाख रुपये की लागत से बैंक लोन लेकर निर्माण हुआ है।
सतबीर ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि जिस तरह से उसके मकान को टारगेट किया गया है, उससे लगता है कि निगमायुक्त ने झुग्गी खाली कराने के लिए खुद आग लगवा दी। यह पूरा कदम डीएलएफ को लाभ पहुंचाने के लिए उठाया गया है।
पहले भी लगे हैं आरोप
हुडा प्रशासक के पद पर रहने के दौरान निगमायुक्त पर यह आरोप लग चुका है कि उन्होंने नाथूपुर गांव के लोगों को परेशान कर डीएलएफ को लाभ पहुंचाया है। उस दौरान तोड़फोड़ कर एक सड़क का निर्माण कराने की काफी चर्चा रही।
बैंक लोन पर सवाल
नगर निगम ने जिस भवन को अवैध बताकर ढहा दिया, वह बैंक की लोन पर बना है। सवाल यह है कि अगर भवन के कागज पूरे नहीं थे तो बैंक ने लोन कैसे दे दिया। इस खुलासे के बाद पुलिस जांच में बैंक प्रबंधन से भवन के लोन के दौरान उपलब्ध कराए गए पेपर की भी जानकारी लेगी।