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पीड़ितों को ऑटो से भेजना पड़ा अस्पताल, व्यवस्था की खुली पोल
Mon, 09 Dec 2019 05:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 09 Dec 2019 05:53 AM IST
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आपातकालीन स्थिति...
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली में आपातकालीन स्थिति के लिए सरकार की एंबुलेंस सेवा है, लेकिन अनाज मंडी अग्निकांड के बाद व्यवस्था की पोल खुलती दिखाई दी। दिल्ली अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों को घायलों को एंबुलेंस न मिलने के कारण ऑटो में भेजना पड़ा। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है कि दिल्ली अग्निशमन विभाग के कर्मचारी घायलों को अस्पताल भेजने के लिए ऑटो में बैठा रहे हैं। हालांकि, देर शाम तक दिल्ली स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसे लेकर स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया। दिल्ली कैट्स यूनियन के अनुसार, राजधानी में एंबुलेंस सेवाएं लंबे समय से प्रभावित हैं।
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ठेका प्रथा के चलते यूनियन के कर्मचारी कई बार हड़ताल और प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन एंबुलेंस सेवा के हाल ठीक नहीं है। आए दिन एंबुलेंस कहीं भी खड़ी हो जाती हैं। कई एंबुलेंस तो अब बेड़े से भी बाहर हो गई हैं। उसकी वजह है एंबुलेंस का रखरखाव ठीक नहीं होना है।
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....और मदद के लिए आवाज आनी बंद हो गई
अनाज मंडी में लगी आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि धुएं में फंसे लोग खुद को बचाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन कुछ ही पल बाद उनकी आवाजें बंद होने लगी। जान बचने की उम्मीद में कुछ लोग इमारत में इधर-उधर भागने लगे। कुछ ऐसे लोग थे, जिन्होंने मौके पर पहुंचे फायर कर्मियों की मदद से छत पर जाकर जान बचाई।
फैक्टरी के पड़ोस में रहने वाले चश्मदीद मोहम्मद फिरोज ने बताया कि घटना के समय अजान की आवाजें आ रही थी। वह बाहर निकला तो देखा कि पड़ोस की इमारत से धुआं निकल रहा है, लेकिन इमारत बाहर से बंद होने की वजह से कोई अंदर नहीं जा पा रहा था। अंदर मौजूद लोग अपनी जान बचाने के लिए चिल्ला रहे थे।
अंदर नहीं जा पाने की स्थिति में बाहर मौजूद लोग बाल्टी से पानी फेंक कर आग बुझाने की कोशिश करने लगे। इसी बीच फायर कर्मी मौके पर पहुंच गए। गली संकरी होने की वजह से दमकल की छोटी गाड़ियां ही अंदर पहुंच पाई।
मजदूरों को फंसा देख फायरकर्मी दूसरे मकान से छत पर पहुंचे और फिर ऊपर के दरवाजे को तोड़कर अंदर प्रवेश कर लोगों को बचाया। पड़ोस में रहने वाले खालिद ने बताया कि उसकी आग लगने वाली इमारत की तीसरी मंजिल पर रहने वाले अफरोज से बात हुई थी।
उसने बताया कि वह करीब साढ़े चार बजे तक काम करने के बाद सोने की तैयारी कर रहा था। थोड़ी सी नींद लगी थी कि कि सवा पांच बजे शोर सुनकर नींद खुल गई।
वह बाहर की ओर गया, लेकिन पूरी मंजिल पर धुआं फैल हुआ था, जिसकी वजह से उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। वह इमारत की ऊपरी मंजिल की ओर भागा। फिर फायरकर्मियों के आने के बाद उसकी जान बच सकी।