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फैसला: विदेश में लिखी वसीयत, दिल्ली की संपत्ति में बेटी-दामाद को मिल हक, अदालत से मिला प्रशासन पत्र

Mon, 19 Oct 2026 06:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 19 Oct 2026 06:48 AM IST
सार

मामले में एक अहम पहलू यह भी रहा कि दामाद के पक्ष में दावा की गई हिस्सेदारी का संबंध मलेशिया में लिखी गई वसीयत से था।

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Verdict: Will written abroad grants daughter and son-in-law rights to Delhi property
demo pic - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के पॉश इलाके आनंद निकेतन की एक संपत्ति में बेटी और दामाद को बराबर-बराबर हिस्से के लिए प्रशासन पत्र मिल गया है। पटियाला हाउस कोर्ट ने स्वर्गीय सतींदर कुमार पुरी की संपत्ति से जुड़े मामले में बेटी दिम्पल पुरी और दामाद थायलन गौरी मुहुंदन के पक्ष में लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन जारी करने का आदेश दिया। मामले में एक अहम पहलू यह भी रहा कि दामाद के पक्ष में दावा की गई हिस्सेदारी का संबंध मलेशिया में लिखी गई वसीयत से था।

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एक वसीयत मलेशिया में, मामला दिल्ली की अदालत में : दरअसरल, सतींदर कुमार पुरी ने यह संपत्ति 2003 में दिल्ली विकास प्राधिकरण से पंजीकृत विक्रय पत्र के जरिए हासिल की थी। उनका निधन 24 दिसंबर 2011 को हुआ था। उनकी पत्नी रम्मा पुरी का भी 15 दिसंबर 2016 को निधन हो गया। दोनों ने संपत्ति के संबंध में कोई वसीयत नहीं छोड़ी थी। सतींदर कुमार पुरी की दो बेटियां थीं सबीना पुरी और दिम्पल पुरी। 
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अदालत के निष्कर्ष के अनुसार, संपत्ति का आधा अविभाजित हिस्सा सबीना पुरी को मिला था। सबीना ने अपनी मृत्यु से पहले 8 जून 2012 को मलेशिया में वसीयत लिखकर अपनी पूरी संपत्ति पति थायलन गौरी मुहुंदन के नाम कर दी। बाद में उनके पति ने मलेशिया के उच्च न्यायालय से वसीयत का प्रोबेट भी हासिल किया। वहीं, संपत्ति के शेष आधे हिस्से को लेकर दिम्पल पुरी ने अदालत में प्रशासन पत्र जारी करने की मांग की। अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर उन्हें शेष आधे अविभाजित हिस्से का हकदार माना।
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आपत्ति नहीं आई, लेकिन मालिकाना हक पर फैसला नहीं
मामले में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कराई गई थी, लेकिन किसी व्यक्ति या पक्षकार ने आपत्ति नहीं जताई। प्रतिवादी थायलन गौरी मुहुंदन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए और अपनी बेटी संध्या थायलन की ओर से भी अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया। अदालत ने दोनों के पक्ष में संपत्ति के समान आधे-आधे अविभाजित हिस्से के लिए प्रशासन पत्र जारी करने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कार्यवाही में संपत्ति के मालिकाना हक का अंतिम निर्धारण नहीं किया गया है।

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