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मोहलत: एनसीआर की औद्योगिक इकाइयों में 30 नवंबर तक लगाने होंगे पीटीजेड कैमरे, लाइव फीड भेजना भी अनिवार्य

Mon, 19 Oct 2026 06:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 19 Oct 2026 06:35 AM IST
सार

अब निर्धारित श्रेणियों की सभी संबंधित प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों को 30 नवंबर तक पैन-टिल्ट-जूम (पीटीजेड) कैमरे लगाने होंगे।

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Deadline: PTZ cameras must be installed in industrial units across the NCR by November 30
CAQM - फोटो : caqm.nic

विस्तार

एनसीआर में औद्योगिक प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने निगरानी व्यवस्था का विस्तार किया है। अब निर्धारित श्रेणियों की सभी संबंधित प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों को 30 नवंबर तक पैन-टिल्ट-जूम (पीटीजेड) कैमरे लगाने होंगे।

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इनसे ईंधन डालने की प्रक्रिया, गैस मीटर, चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की निगरानी की जाएगी। कैमरों की लाइव वीडियो फीड केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को भेजनी होगी।
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सीएक्यूएम ने पांच अक्तूबर के पुराने आदेश के मद्देनजर यह निर्देश जारी किया है। पहले निगरानी के लिए अतिरिक्त कैमरे लगाने का प्रावधान सीमित था, लेकिन अब इसे आदेश संख्या 98 के दायरे में आने वाली सभी निर्धारित औद्योगिक श्रेणियों पर लागू किया गया है। आदेश के अनुसार, कैमरे इस तरह लगाए जाएंगे कि बॉयलर, थर्मिक फ्लूड हीटर, भट्ठियों, किल्न और अन्य ईंधन आधारित उपकरणों में ईंधन डालने की गतिविधियां स्पष्ट दिखाई दें।
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गैस आधारित इकाइयों में गैस मीटर, चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन और ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) के सैंपलिंग स्थानों को भी कवर करना होगा। जहां लागू हो, धुआं खींचने वाली प्रणालियों पर भी कैमरे लगाने होंगे। जरूरत के अनुसार कैमरों की संख्या और दिशा तय करनी होगी, ताकि कोई महत्वपूर्ण गतिविधि निगरानी से न छूटे।

लाइव फीड बाधित होने पर देनी होगी सूचना
औद्योगिक इकाइयों को कैमरे, संचार व्यवस्था और बिजली आपूर्ति चालू रखने के साथ बैकअप की व्यवस्था करनी होगी। रात में काम करने वाली इकाइयों में भी गतिविधियां स्पष्ट दिखाई देनी चाहिए। कैमरे खराब होने या वीडियो फीड बाधित होने पर संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अथवा डीपीसीसी को सूचना देनी होगी। समस्या दूर करने के लिए की गई कार्रवाई का विवरण भी देना होगा।

उत्सर्जन मानकों का पालन जरूरी
यह व्यवस्था केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से चिह्नित 17 अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योग श्रेणियों और रेड श्रेणी के मध्यम एवं बड़े वायु प्रदूषणकारी उद्योगों पर लागू होगी। बॉयलर या थर्मिक फ्लूड हीटर इस्तेमाल करने वाले खाद्य प्रसंस्करण और कपड़ा उद्योगों के साथ भट्ठी वाले धातु उद्योग भी इसके दायरे में शामिल हैं।

सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया है कि कैमरों से निगरानी पहले से लागू ईंधन प्रतिबंधों और प्रदूषण नियंत्रण मानकों का विकल्प नहीं, बल्कि अतिरिक्त व्यवस्था है। निर्धारित औद्योगिक श्रेणियों में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले सूक्ष्मकणों के उत्सर्जन की अधिकतम सीमा 50 मिलीग्राम प्रति सामान्य घनमीटर है।


आयोग के अनुसार, सर्दियों में प्रतिकूल मौसम के कारण प्रदूषकों का फैलाव कम होने से औद्योगिक उत्सर्जन का प्रभाव बढ़ जाता है। नई व्यवस्था से नियमों के उल्लंघन का समय रहते पता लगाने में मदद मिलेगी। इसे लागू कराने की जिम्मेदारी सीपीसीबी, संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों, डीपीसीसी और दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान सरकारों की होगी।

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