दो साल की बच्ची हुई डॉक्टरों की लापरवाही की शिकार, कभी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाएगी
पूर्वी दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबी) के डॉक्टरों पर चिकित्सीय लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि इन डॉक्टरों की वजह से बच्ची कभी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाएगी। बहरहाल पीड़ित परिजनों की शिकायत पर अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता गोकुलपुरी के गंगा विहार निवासी सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि पिछले साल 30 नवंबर को उनकी दो साल की बेटी प्रियांशी सीढ़ियों से गिर गई थी। जिसके बाद वह बच्ची को लेकर जीटीबी अस्पताल की इमरजेंसी में ले गए।
वहां एक्स रे कराने के बाद पैर टूटने की बात कही। पैर में प्लास्टर भी लगा दिया। 21 दिन बाद डॉक्टरों ने प्लास्टर भी काट दिया। लेकिन इसके दो सप्ताह बाद डॉक्टरों के बुलाने पर जब वह गए तो डॉक्टरों ने प्लास्टर काटकर बिना किसी जांच के यह कहते हुए बच्ची को घर भेज दिया कि बच्ची कुछ दिनों में चलने लग जाएगी।
फ्रैक्चर पैर में नहीं था बल्कि उसका कूल्हा खिसक गया था
लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 25 जनवरी को एक प्राइवेट अस्पताल ले जाने के बाद पता चला कि फ्रैक्चर पैर में नहीं था बल्कि उसका कूल्हा खिसक गया था। छह फरवरी को डॉक्टरों ने वहां ऑपरेशन कर कूल्हा तो अपनी जगह बिठा दिया, फिलहाल बच्ची को प्लाटर लगा है जो अगले दो महीने तक रहेगा।
लेकिन इसके बाद भी प्रियांशी कभी ठीक से चल पाएगी या नहीं इसमें संदेह है। सुरेंद्र ने इसे लेकर मुख्यमंत्री, अस्पताल निदेशक, दिल्ली स्वास्थ्य विभाग और दिल्ली महिला आयोग को शिकायत दे दी है।
चिकित्सा निदेशक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। हड्डी रोग विभाग से इसका जवाब मांगा गया है। जांच की रिपोर्ट आने में कुछ समय लग सकता है। अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।