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दिल्लीः एयरपोर्ट लाइन को पिंक लाइन से जोड़ने वाला ट्रैवलेटर खुला
Sun, 10 Feb 2019 07:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 10 Feb 2019 07:03 AM IST
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- फोटो : जी पॉल
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एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के धौला कुआं मेट्रो स्टेशन को पिंक लाइन के साउथ कैंपस स्टेशन से जोड़ने के लिए बनाया जा रहा ट्रैवलेटर तैयार हो चुका है। शनिवार को दिल्ली मेट्रो ने इस ट्रैवलेटर को यात्रियों के लिए खोल दिया।
यह ट्रैवलेटर 23.6 मीटर की ऊंचाई पर अब तक का दो स्टेशनों को जोड़ने वाला पहला फुटओवर ब्रिज है, जिसमें समतल ट्रैवलेटर लगाए गए हैं। यात्रियों को इस ट्रैवलेटर पर बस खड़ा होना और वे दूसरे स्टेशन तक पहुंच जाएंगे।
डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक मंगू सिंह ने ट्रैवलेटर का शनिवार को निरीक्षण किया और उसके बाद इसे यात्रियों के लिए खोला गया। पिंक लाइन के साउथ कैंपस मेट्रो स्टेशन और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के धौला कुआं स्टेशन के बीच 920 मीटर का फासला है।
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इन दोनों स्टेशनों के बीच 6.1 मीटर चौड़े फुट ओवरब्रिज केे बेस पर 22 अलग-अलग हिस्सों से ट्रैवलेटर को तैयार किया गया है। ट्रैवलेटर के सभी हिस्सों को एस्क्लेटर की तरह जोड़कर तैयार किया गया है। इस ट्रैवलेटर के खुलने से यात्रियों को एयरपोर्ट लाइन से पिंक लाइन पर और पिंक लाइन से एयरपोर्ट लाइन पर पहुंचने में बेहद आसानी होगी।
ट्रैवलेटर पर यात्रियों को सिर्फ खड़ा होना होगा और उसके बाद ट्रैवलेटर का स्वचालित समतल प्लेटफॉर्म यानी ट्रैवलेटर ऑटोमेटिक तरीके से यात्रियों को आगे पहुंचाएगा।
920 मीटर के फुटओवर ब्रिज पर अलग-अलग 22 ट्रैवलेटर को जोड़कर एक लंबा पुल बनाया गया है। यह ट्रैवलेटर एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन कॉनकोर्स एरिया और पिंक लाइन के प्लेटफॉर्म से जुड़ा है।
इस ट्रैवलेटर पर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आने वाले यात्रियों को यहां पर ट्रैवलेटर का सबसे ज्यादा फायदा होगा।
लोग यहां इंटरचेज करके पिंक लाइन पर सफर कर सकेंगे। यहां लाइटिंग की भी उचित व्यवस्था की गई है और ट्रैवलेटर को साइड व छत हर ओर से कवर किया गया है, जिससे हर मौसम यात्री यहां सुरक्षित रहेंगे।
कई बार अटका काम
इस ट्रैवलेटर के खुलने के लिए यात्रियों को काफी इंतजार करना पड़ा है। ट्रैवलेटर को पहले अक्तूबर तक तैयार किया जाना था, लेकिन साउथ कैंपस के पास रिंग रोड पर ट्रैवलेटर के लिए ट्रैफिक पुलिस की एनओसी नहीं मिलने के कारण इसका काम बीच में लटक गया था। इसके बाद जब ट्रैफिक पुलिस से ट्रैवलेटर को एनओसी मिली, तो नवंबर में दिल्ली में बढ़े प्रदूषण के कारण 9 नवंबर से निर्माण कार्य पर रोक लगने के कारण भी इसका काम फिर से प्रभावित हुआ।
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यह ट्रैवलेटर 23.6 मीटर की ऊंचाई पर अब तक का दो स्टेशनों को जोड़ने वाला पहला फुटओवर ब्रिज है, जिसमें समतल ट्रैवलेटर लगाए गए हैं। यात्रियों को इस ट्रैवलेटर पर बस खड़ा होना और वे दूसरे स्टेशन तक पहुंच जाएंगे।
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डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक मंगू सिंह ने ट्रैवलेटर का शनिवार को निरीक्षण किया और उसके बाद इसे यात्रियों के लिए खोला गया। पिंक लाइन के साउथ कैंपस मेट्रो स्टेशन और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के धौला कुआं स्टेशन के बीच 920 मीटर का फासला है।
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इन दोनों स्टेशनों के बीच 6.1 मीटर चौड़े फुट ओवरब्रिज केे बेस पर 22 अलग-अलग हिस्सों से ट्रैवलेटर को तैयार किया गया है। ट्रैवलेटर के सभी हिस्सों को एस्क्लेटर की तरह जोड़कर तैयार किया गया है। इस ट्रैवलेटर के खुलने से यात्रियों को एयरपोर्ट लाइन से पिंक लाइन पर और पिंक लाइन से एयरपोर्ट लाइन पर पहुंचने में बेहद आसानी होगी।
ट्रैवलेटर पर यात्रियों को सिर्फ खड़ा होना होगा और उसके बाद ट्रैवलेटर का स्वचालित समतल प्लेटफॉर्म यानी ट्रैवलेटर ऑटोमेटिक तरीके से यात्रियों को आगे पहुंचाएगा।
920 मीटर के फुटओवर ब्रिज पर अलग-अलग 22 ट्रैवलेटर को जोड़कर एक लंबा पुल बनाया गया है। यह ट्रैवलेटर एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन कॉनकोर्स एरिया और पिंक लाइन के प्लेटफॉर्म से जुड़ा है।
इस ट्रैवलेटर पर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आने वाले यात्रियों को यहां पर ट्रैवलेटर का सबसे ज्यादा फायदा होगा।
लोग यहां इंटरचेज करके पिंक लाइन पर सफर कर सकेंगे। यहां लाइटिंग की भी उचित व्यवस्था की गई है और ट्रैवलेटर को साइड व छत हर ओर से कवर किया गया है, जिससे हर मौसम यात्री यहां सुरक्षित रहेंगे।
कई बार अटका काम
इस ट्रैवलेटर के खुलने के लिए यात्रियों को काफी इंतजार करना पड़ा है। ट्रैवलेटर को पहले अक्तूबर तक तैयार किया जाना था, लेकिन साउथ कैंपस के पास रिंग रोड पर ट्रैवलेटर के लिए ट्रैफिक पुलिस की एनओसी नहीं मिलने के कारण इसका काम बीच में लटक गया था। इसके बाद जब ट्रैफिक पुलिस से ट्रैवलेटर को एनओसी मिली, तो नवंबर में दिल्ली में बढ़े प्रदूषण के कारण 9 नवंबर से निर्माण कार्य पर रोक लगने के कारण भी इसका काम फिर से प्रभावित हुआ।