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रोजाना दांव पर मासूम जिंदगियां
अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sat, 03 May 2014 02:09 PM IST
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गुड़गांव के निजी स्कूल वैन और रिक्शे में बैठकर स्कूल जाने वाले बच्चों की जिंदगी दांव पड़ लगी रहती है।
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नियमों को ताक पर रखकर चलने वाले इन वाहनों पर ट्रैफिक पुलिस की नजर तो पड़ती है, लेकिन इन पर कार्रवाई नहीं की जाती है।
दरअसल, हरियाणा सरकार ने बच्चों को स्कूलों से घर तक सुरक्षित लाने और ले-जाने के लिए गाइड लाइन जारी की है। इसके मुताबिक, निजी वैन का रंग भी पीला होना चाहिए।
अगर वैन प्राइवेट है तो उसमें ‘ऑन स्कूल ड्यूटी’ लिखा होना चाहिए और सीट के अनुसार ही बच्चे की संख्या होनी चाहिए। लेकिन, इन वाहनों में इन नियमों का पालन नहीं किया जाता।
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अमूमन स्कूलों में प्राइवेट वैन लगी हुई हैं। कई रूटों पर स्कूल बस नहीं चलने की वजह से प्राइवेट वैन और रिक्शा को अभिभावक तरजीह देते हैं। कई जगहों पर बच्चे की सुविधा के लिए और घर तक सेफ्टी से पहुंचने के लिए प्राइवेट वाहन और रिक्शा बेहतर मानते हैं।
बहरहाल, अधिकतर प्राइवेट वैनों में तय क्षमता से दोगुना बच्चों को बैठाया जाता है। वैन के पीछे सीएनजी लगी होती है, इसके बावजूद बच्चों को पीछे बैठाया जाता है।
गर्मी के इस मौसम में बच्चों के लिए पीछे बैठना किसी मुसीबत से कम नहीं होता है। घर तक बच्चे पहुंचते-पहुंचते पसीने से तर-बतर हो जाते हैं। वहीं, रिक्शा वाले भी तय नियम से ज्यादा बच्चों को बैठाते हैं और कई बच्चे तो रिक्शा में लटके रहते हैं।