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Delhi NCR News: तीस हजारी कोर्ट ने सुचेता दलाल की याचिका खारिज की
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट ने वरिष्ठ पत्रकार सुचेता दलाल और उनकी वेबसाइट मनीलाइफ द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें स्टर्लिंग बायोटेक बैंक घोटाले से जुड़े मनोज केसरीचंद संदेसरा और उनके परिवार को रिपोर्ट करने पर लगी रोक (गैग ऑर्डर) को चुनौती दी गई थी।
कोर्ट ने याचिका को इस चरण में अप्रासंगिक माना और कहा कि अपीलकर्ता संबंधित न्यायाधीश के समक्ष ही अपना मामला रख सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। मामले के अनुसार मनोज संदेसरा ने अदालत से एकतरफा अंतरिम आदेश प्राप्त किया था, जिसमें मीडिया को स्टर्लिंग बायोटेक घोटाले से उनकी कथित संलिप्तता से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने या ऑनलाइन सामग्री रखने से रोका गया था। इस आदेश के तहत गूगल और मेटा जैसी कंपनियों को भी ऐसी सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए थे। सुचेता दलाल ने इस गैग ऑर्डर को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए चुनौती दी थी। उन्होंने तर्क दिया कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर रिपोर्टिंग का अधिकार मौलिक है।
यह है मामला : स्टर्लिंग ग्रुप के प्रमोटर्स (मुख्य रूप से संदेसरा परिवार) पर भारतीय बैंकों से हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। यह घोटाला पीएनबी घोटाले से भी बड़ा बताया जाता है। संदेसरा भाई 2017 में देश छोड़कर भाग गए थे। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समझौते के आधार पर उन्हें राहत दी थी, जिसके बाद आपराधिक कार्यवाही प्रभावित हुई।
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नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट ने वरिष्ठ पत्रकार सुचेता दलाल और उनकी वेबसाइट मनीलाइफ द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें स्टर्लिंग बायोटेक बैंक घोटाले से जुड़े मनोज केसरीचंद संदेसरा और उनके परिवार को रिपोर्ट करने पर लगी रोक (गैग ऑर्डर) को चुनौती दी गई थी।
कोर्ट ने याचिका को इस चरण में अप्रासंगिक माना और कहा कि अपीलकर्ता संबंधित न्यायाधीश के समक्ष ही अपना मामला रख सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। मामले के अनुसार मनोज संदेसरा ने अदालत से एकतरफा अंतरिम आदेश प्राप्त किया था, जिसमें मीडिया को स्टर्लिंग बायोटेक घोटाले से उनकी कथित संलिप्तता से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने या ऑनलाइन सामग्री रखने से रोका गया था। इस आदेश के तहत गूगल और मेटा जैसी कंपनियों को भी ऐसी सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए थे। सुचेता दलाल ने इस गैग ऑर्डर को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए चुनौती दी थी। उन्होंने तर्क दिया कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर रिपोर्टिंग का अधिकार मौलिक है।
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यह है मामला : स्टर्लिंग ग्रुप के प्रमोटर्स (मुख्य रूप से संदेसरा परिवार) पर भारतीय बैंकों से हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। यह घोटाला पीएनबी घोटाले से भी बड़ा बताया जाता है। संदेसरा भाई 2017 में देश छोड़कर भाग गए थे। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समझौते के आधार पर उन्हें राहत दी थी, जिसके बाद आपराधिक कार्यवाही प्रभावित हुई।
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