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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Timely treatment can save the legs of 80 percent of patients.

Delhi NCR News: समय पर इलाज से बच सकते हैं 80 फीसदी मरीजों के पैर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 09:27 PM IST
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-डायबिटीज के मरीजों को पैरों में घाव, सूजन और संक्रमण को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। डायबिटीज के मरीजों के लिए पैरों की छोटी-सी चोट भी गंभीर खतरे का कारण बन सकती है। समय पर पहचान और सही इलाज नहीं मिलने पर घाव संक्रमण में बदल सकता है। देश में हर साल करीब एक लाख लोगों के पैर काटने पड़ते हैं, जबकि लगभग 80 प्रतिशत मामलों को समय रहते इलाज से रोका जा सकता है। वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों ने वीएसआई-एएसवीएस 2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यह चिंता जताई। विशेषज्ञों ने डायबिटीज के मरीजों को नियमित रूप से पैरों की जांच कराने और घाव को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी। नई दिल्ली के एरोसिटी स्थित एक निजी होटल में 8-10 अक्तूबर तक आयोजित वीएसआई-एएसवीएस 2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत और विदेशों के 400 से अधिक विशेषज्ञ और एक हजार से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। एक अध्ययन के अनुसार, देश में करीब 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं। ऐसे लोगों में पैरों से जुड़ी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है।

अगर ऐसा हो, तो तुंरत डॉक्टर से करें संपर्क : वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. तरुण ग्रोवर ने कहा कि सबसे जरूरी है बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में करना। यदि डायबिटीज के मरीज के पैर में घाव ठीक नहीं हो रहा है, रंग बदल रहा है, दर्द बढ़ रहा है या पैर ठंडा पड़ रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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