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इस परिवार के तीन पीढ़ियों को मिला नेशनल अवार्ड

Sun, 16 Feb 2014 12:21 AM IST
रश्मि ओझा/अमर उजाला, गाजियाबाद
रश्मि ओझा/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Sun, 16 Feb 2014 12:21 AM IST
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Three generations of the family received the National Award

शिल्प गुरु और सर्वश्रेष्ठ शिल्पकार का सम्मान पाना इस परिवार के लोगों की परंपरा बन चुकी है। शिल्पकारी के हुनर के कारण परिवार की पिछली तीन पीढ़ी में सात सदस्यों ने हस्तशिल्प पुरस्कार को अपने नाम पर दर्ज कराया है। यह अनोखा परिवार है पिलखुवा के आबशार हुसैन का।

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गाजियाबाद में आयोजित फ्लावर शो में शिल्पकारी प्रदर्शनी में अपना स्टाल लगाने वाले आबशार हुसैन ने बताया कि 1987 में उन्हें ‘ब्लॉक कार्विंग’ और ‘तालकशी वर्क’ केलिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।
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1984 से ‘फेस्टिवल ऑफ इंडिया’ नामक एक कार्यक्रम शुरू हुआ था। इस कार्यक्रम के तहत विदेशों में भी जगह-जगह भारतीय हस्तशिल्प कलाकृतियों की प्रदर्शनी आयोजित की गई थी। न्य्रूयोर्क में आयोजित एक प्रदर्शनी में उन्होंने शिल्पकारी का लाइव डेमो दिया था। इसकी काफी सराहना हुई थी।
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यूके में भी उन्होंने ‘गोल्डन आई एक्जिविजशन’ सहित विदेशों में कई एक्जिविशन में भाग लिया था। अबशार हुसैन के अनुसार मिनिस्ट्री ऑफ टेक्सटाइल द्वारा आयोजित हर कार्यक्रम में वह अपनी शिल्पकारी का प्रदर्शन करते हैं। शिल्पकारी में परिवार के सात लोगों को विभिन्न राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

एमसीए की पढ़ाई कर रहे आबशार के छोटे बेटे खुर्रम आफरीदी ने बताया कि वह कला तो सीख रहा है, मगर शिल्पकारी को अपना व्यवसाय नहीं बनाएगा। इसका कारण है कि अब शिल्पकारी के लिए कारीगर नहीं मिलते। पहले

कारीगरों को प्रशिक्षण देना पड़ता है और नए लोगों में इतना धैर्य नहीं है कि वह लगन से इस कला को सीखें। साथ ही अब शीशम पर प्रतिबंध होने के कारण लकड़ी भी काफी मुश्किल से मिल पाती है। इसलिए नए प्रयोग कर विदेशी लकड़ी ’स्टीम बीच’ पर डिजाइन बनाते हैं।


हमने बुजुर्गों से सीखी है यह कला
आबशार हुसैन ने बड़े गर्व से बताया कि शिल्पकारी का काम उनका खानदानी काम है और यह हुनर उन्हें उनके बुजुर्गों से मिला है। उनके बड़े भाई सरदार हुसैन को नेशनल अवार्ड के अलावा ‘शिल्प गुरु’ का अवार्ड भी मिला है। इसके अलावा भाई अंसार हुसैन और भतीजे फराज, अरशद, समेत कुल सात सदस्यों ने हस्तशिल्प में नेशनल ईनाम अपने नाम किए हैं।

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