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पीड़ित परिजनों की गुहारः चला गया लाल...अब कागज तो दे दो 

Mon, 02 Mar 2020 06:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 02 Mar 2020 06:47 AM IST
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The request of violence victims family in delhi
विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली हिंसा में मारे गए लोगों के परिवार अब भी अपनों की मौत की वजह से अनजान हैं। परिजन वजह जानना चाहते हैं, लेकिन उन्हें ये सब बताने वाला कोई नहीं है। जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी में चार दिन तक शवों को रखे जाने के बाद पोस्टमार्टम तो हो गया पर अब तक परिजनों को रिपोर्ट नहीं मिली है। 

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ओल्ड मुस्तफाबाद निवासी इकरा और नगमा सरकार से अपने भाइयों की मौत का न्याय मांग रही हैं। इनके भाई आमिर और हाशिम मंगलवार शाम बाइक से घर जाने के लिए निकले। जब बहन ने फोन किया था तो भाइयों ने 5 मिनट में घर पहुंचने की बात कही। 
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लेकिन इसके बाद पूरी रात दोनों भाइयों का फोन बंद आया। बुधवार को जब वह थाने पहुंचीं तो पता चला कि दोनों भाइयों के शव पुलिस को नाले से मिले हैं। इकरा और नगमा के पास मृतक भाइयों की न पीएम रिपोर्ट है और न ही इलाज संबंधी कोई कागजात।  
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वहीं, सोगारथ ने बताया कि उपद्रवियों ने उनके इकलौते बेटे नितिन की हत्या कर दी। पोस्टमार्टम के बाद उन्हें भी कोई कागज नहीं मिला है। हालांकि सोगारथ का कहना है कि बेटे के आगे अब कागज के टुकड़े की कोई अहमियत नहीं बचती, लेकिन वे हत्यारों को सजा दिलाना चाहते हैं। 

इनके अलावा मृतक दिलशाद के परिजन फराज, सुभाष विहार निवासी मृतक सोनू, बुलंदशहर निवासी अशफाक, शान मोहम्मद के परिजनों का भी यही कहना है कि उन्हें अब तक कागजात नहीं मिले हैं। 

इस संबंध में जीटीबी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार का कहना है कि परिजनों को किसी भी प्रकार के कागज उपलब्ध कराने का अधिकार उनके पास नहीं है। 


वहीं एक अन्य फोरेंसिक डॉक्टर ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद संबंधित थाना क्षेत्र में रिपोर्ट भेज दी जाती है। वहीं, जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाली इनायत का कहना है कि उपचार संबंधी कागजात, एमएलसी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पीड़ित परिवार का अधिकार होता है। 

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