फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The condition of UP is pathetic: More than 99 percent of the population is suffering due to air pollution, lack of a solid monitoring system

यूपी की स्थिति दयनीय : 99 फीसदी से ज्यादा आबादी वायु प्रदूषण के चलते बेहाल, ठोस निगरानी तंत्र का अभाव

Wed, 08 Sep 2021 02:29 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 08 Sep 2021 02:29 AM IST
सार

इस रिपोर्ट के मुताबिक सिंधु गंगा के मैदान वायु प्रदूषण के लिहाज से देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित क्षेत्रों में आते हैं। इस विशाल भूभाग के सबसे मध्य में स्थित उत्तर प्रदेश जिसे गंगा के मैदान का हद्य भी कहा जाता है कि 99.4 फीसदी जनता प्रदूषित माहौल में निवास करती है। यहां प्रदूषण का असर तय मानकों से कहीं अधिक है। 

विज्ञापन
The condition of UP is pathetic: More than 99 percent of the population is suffering due to air pollution, lack of a solid monitoring system
आगरा में प्रदूषण (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

क्लाइमेट ट्रेंडस द्वारा उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण की समस्या को लेकर मंगलवार को एक रिपोर्ट  में कहा गया है कि राज्य की 99 प्रतिशत से ज्यादा आबादी प्रदूषित हवा में सांस ले रही है।  इन सबके मध्य खतरनाक स्थिति यह भी है कि इस स्थिति की वास्तविकता का आकलन करने के लिए राज्य के पास पर्याप्त निगरानी तंत्र भी नहीं है। वायु प्रदूषण सरीखे अदृश्य दानव से निजात पाने के लिए इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसे आम लोगों का मुद्दा बनाकर ही वायु प्रदूषण की गंभीर होती समस्या से छुटकारा पाने का रास्ता निकल सकता है।  क्लाइमेट ट्रेंडस ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण की समस्या को लेकर एक वेबीनार भी आयोजित किया था।                                                

विज्ञापन

     
इस रिपोर्ट के मुताबिक सिंधु गंगा के मैदान वायु प्रदूषण के लिहाज से देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित क्षेत्रों में आते हैं।  इस विशाल भूभाग के सबसे मध्य में स्थित उत्तर प्रदेश जिसे गंगा के मैदान का हद्य भी कहा जाता है कि 99.4 फीसदी जनता प्रदूषित माहौल में निवास करती है। यहां प्रदूषण का असर तय मानकों से कहीं अधिक है। इस रिपोर्ट में जनवरी 2017 से जुलाई 2021 के बीच राज्य के 27 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों से पीएम 2.5(धूल के महीन कण) के प्रतिमाह औसत संघनन के आंकड़े  एकत्र किए गए।

विज्ञापन


 इस अध्ययन  का लक्ष्य  राज्य के वायु गुणवत्ता निगरानी तंत्र की एक तस्वीर पेश करना और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए जरूरी उपाय सुझाना है। इसमें पाया गया कि प्रदेश के वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क में सुधार और तुरंत प्रभाव से निगरानी तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है।  इस रिपोर्ट में सिफारिश की गई की जनता के स्वास्थ और उनके हितों की रक्षा के लिए एक निश्चित बिंदु पर वायु गुणवत्ता की गंभीरता के आधार पर प्रदूषण के स्रोतों पता लगा कर उनको कम करने या समाप्त करने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।  ग्रामीण अंचलों में प्रदूषणकारी तत्वों के संघनन का कोई रिकॉर्ड प्राप्त नहीं हुआ, लेकिन वहां रहने वाले लोग तथा अन्य प्रदूषण के सबसे अधिक प्रभाव में रहते हुए पाए गए।  इसकी वजह यह है कि इन इलाकों में बड़े पैमाने पर रोजमर्रा के जीवन को चलाने के लिए कोयला लकड़ी और अन्य कारकों के निर्भरता देखी गई। यही इस वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है, इसलिए इस रिपोर्ट में वायु गुणवत्ता निगरानी तंत्र को शहरों के साथ-साथ गांव में भी स्थापित किए जाने की सिफारिश की गई, ताकि वहां की वायु गुणवत्ता भी  सुधर सके। इस रिपोर्ट को लेकर विशेषज्ञो का मत है कि यह रिपोर्ट वस्तुस्थिति को बताने के लिए काफी है। अब समय आ गया है जब इसके लिए आम जनता को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन


 इस संदर्भ में आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियर विभाग के अध्यक्ष और नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य प्रोफेसर एनके त्रिपाठी ने कहा वायु प्रदूषण लोगों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में लोगों की पहल और उनकी सतर्कता इसकी कम करने के लिए बहुत अधिक आवश्यक है।  उन्होंने कहा कोई भी सरकार वैज्ञानिक और कार्ययोजना वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान नहीं कर सकता।  वायु प्रदूषण की सतत निगरानी बहुत आवश्यक है और इसे किसी भी तरह से कम नहीं किया जा सकता।  उन्होंने सतर्क और प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित करने पर जोर दिया।  लखनऊ किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर सूर्यकांत ने कहा फेफड़े वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं और पिछले 5 साल में वायु प्रदूषण को लेकर जो रिपोर्ट शहरों से आ रही है उसमें भारत के कई शहर उच्च स्थान पर हैं। यह स्थिति बहुत ही चिंताजनक और शर्मनाक है।  उन्होंने कहा उत्तर प्रदेश के ज्यादातर शहर प्रदूषण की इस सूची में सर्वोच्च स्थान पर हैं। इसमें करीब 7 शहर तो ऐसे हैं जो वायु प्रदूषण के मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सबसे प्रदूषित हैं।    

 

क्लाइमेट चेंज की आरती खोसला ने कहा कि वायु प्रदूषण के ताजा हालात बेहद चिंताजनक हैं।  वायु प्रदूषण को लेकर आमजन उतना संजीदा नहीं है, जितना होना चाहिए। यही वजह है कि यह जानलेवा मुसीबत हमारे दरवाजे तक पहुंच गई है, और अपने होने का संकेत भी लगातार दे रही है। परंतु इसके बावजूद आम जनता और मौजूदा सिस्टम आंख बंद कर कर बैठा है। ऐसे में आवश्यकता है वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों के तंत्र को मजबूत और दक्ष बनाया जाए और वायु प्रदूषण के प्रति उदासीनता को समाप्त किया जाए। मिस इंडिया प्रतियोगिता की उपविजेता मान्या सिंह ने कहा  वायु प्रदूषण एक खामोश शिकारी है। इससे पार पाने के लिए सबको कमर कस के साथ होना पड़ेगा सभी लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल के प्रति जागरूक करना चाहिए।  
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed