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फिल्म दि एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर के ट्रेलर पर रोक की मांग वाली याचिका पर सुनवाई बुधवार को
Wed, 09 Jan 2019 12:02 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 09 Jan 2019 12:02 AM IST
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हाईकोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल पर बनी हिंदी फीचर फिल्म ‘दि एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ के ट्रेलर पर रोक की मांग वाली जनहित याचिका को सुनवाई के लिए मंगलवार को स्वीकार कर लिया। इस पर बुधवार को सुनवाई होगी।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन की खंडपीठ के समक्ष याची पूजा महाजन के वकील ए. मैत्री ने जनहित याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की। मैत्री ने कहा कि यह जनहित याचिका पूर्व प्रधानमंत्री से संबंधित है।
इसलिए इस पर जल्द सुनवाई की जानी चाहिए, ताकि पूर्व पीएम की छवि को खराब होने से रोका जा सके। यह फिल्म 11 जनवरी को रिलीज होने वाली है। न्यायमूर्ति जस्टिस विभू बाखरू ने सोमवार को क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया था।
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उन्होंने कहा था कि यह याचिका उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है। इस याचिका को जनहित याचिका के रूप में खंडपीठ के समक्ष दायर किया जाना चाहिए।
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मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन की खंडपीठ के समक्ष याची पूजा महाजन के वकील ए. मैत्री ने जनहित याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की। मैत्री ने कहा कि यह जनहित याचिका पूर्व प्रधानमंत्री से संबंधित है।
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इसलिए इस पर जल्द सुनवाई की जानी चाहिए, ताकि पूर्व पीएम की छवि को खराब होने से रोका जा सके। यह फिल्म 11 जनवरी को रिलीज होने वाली है। न्यायमूर्ति जस्टिस विभू बाखरू ने सोमवार को क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया था।
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उन्होंने कहा था कि यह याचिका उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है। इस याचिका को जनहित याचिका के रूप में खंडपीठ के समक्ष दायर किया जाना चाहिए।
याचिका दायर करने वाली फैशन डिजाइनर पूजा महाजन का कहना है कि इस ट्रेलर में मनमोहन सिंह को कांग्रेस की अंदरूनी कलह का शिकार दिखाया गया है।
याची का यह भी कहना है कि इस फिल्म का निर्माण लोगों के दिमाग में गलत छवि बनाने की मंशा से किया गया है। याचिका में ट्रेलर पर रोक लगाने के साथ ही केंद्र, गूगल, यू ट्यूब व सेंसर बोर्ड को इस संबंध में निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
याची का कहना है कि संवैधानिक पदों पर रहे लोगों को सम्मान दिया जाना चाहिए। इस फिल्म के निर्माता को संवैधानिक मर्यादा को भंग करने का कोई अधिकार नहीं है।
याची का यह भी कहना है कि इस फिल्म का निर्माण लोगों के दिमाग में गलत छवि बनाने की मंशा से किया गया है। याचिका में ट्रेलर पर रोक लगाने के साथ ही केंद्र, गूगल, यू ट्यूब व सेंसर बोर्ड को इस संबंध में निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
याची का कहना है कि संवैधानिक पदों पर रहे लोगों को सम्मान दिया जाना चाहिए। इस फिल्म के निर्माता को संवैधानिक मर्यादा को भंग करने का कोई अधिकार नहीं है।