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इंवेस्टर्स समिट घोटाला: 423 करोड़ के 10 प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही बंद, शासन की लटकी तलवार

Wed, 30 Jan 2019 03:53 AM IST
राजेश सैनी रानू पाठक, गाजियाबाद
रानू पाठक, गाजियाबाद Published by: राजेश सैनी Updated Wed, 30 Jan 2019 03:53 AM IST
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Ten projects cost of 423 crore closed before the commencement due to Investors Summit scam
घोटाला - फोटो : amar ujala

उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर निवेश बढ़ाने और औद्योगिक इकाई लगाने के उद्देश्य से की गई इंवेस्टर्स समिट के 10 बड़े प्रोजेक्ट गाजियाबाद में शुरू होने से पहले ही बंद हो गए हैं। 423 करोड़ रुपये के इन प्रोजेक्ट से निवेशकों ने हाथ खींच लिया है। वजह मनपसंद जमीन का न मिल पाना बताया जा रहा है। 33 प्रोजेक्ट शुरू कराने के लिए जिला प्रशासन पूरे जोर लगा रहा है। राहत की बात यह रही कि 254.48 करोड़ रुपये के 19 प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं। 

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देश और विदेश के इंवेस्टर्स को उत्तर प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए बीते 21 व 22 फरवरी को लखनऊ में इंवेस्टर्स समिट आयोजित की गई थी। हर सरकारी विभाग ने टारगेट को पूरा करने के लिए हाथ पांव मारे। समिट को सफल बनाने के लिए उद्योगपतियों और बड़े व्यापारियों पर दबाव बनाया गया।
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इंवेस्टर्स समिट को एक साल होने वाला है। गाजियाबाद से कुल 62 एमओयू साइन किए गए थे। ये प्रोजेक्ट करीब 971.12 करोड़ रुपये के थे। इसमें से 423. 37 करोड़ रुपये के 10 प्रोजेक्ट से उद्यमियों ने शुरू करने से पहले ही हाथ वापस खींच लिया है। 33 प्रोजेक्ट को शुरू कराने के लिए अधिकारी कोशिश कर रहे हैं। एक साल के अंदर 19 प्रोजेक्ट ही शुरू हो पाए हैं। ये प्रोजेक्ट 254.48 करोड़ के हैं।
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इनके प्रोजेक्ट नहीं हुए शुरू
इमर्ज ग्लासेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, विवांता इंडस्ट्री लिमिटेड, एचबी रबर प्राइवेट लिमिटेड, कामाच्छा कंस्ट्रक्शन, हरीन कौर, महावीर सिलिंडर लिमिटेड, न्यूवाफिल एंड इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड, विभोर प्रिंट एंड पैक इंडस्ट्री, मटैंड लिमिटेड और शालिनी टेक्स प्रिंट कंपनी के प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुए।


क्या कहते हैं अधिकारी
जो प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुए उसमें उद्यमियों को उनकी मनपसंद औद्योगिक क्षेत्र में प्लाट नहीं मिल पाया। बाकी प्रोजेक्ट को शुरू कराने के लिए प्रयास जारी है। नए उद्योग लगेंगे तो निश्चित तौर पर लोगों को रोजगार मिलेगा। बीरेंद्र कुमार, जीएम, डीआईसी

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