फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Ten percent population infected with kidney-related disease in india

भारत की दस फीसदी आबादी किडनी से संबंधित बीमारी की चपेट में

Thu, 10 Mar 2016 09:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 10 Mar 2016 09:40 AM IST
विज्ञापन
Ten percent population infected with kidney-related disease in india
मधुमेह

मधुमेह बीमारी के मामले में भारत को विश्व की राजधानी कहा जाता है क्योंकि देश में मधुमेह रोगियों की संख्या सबसे ज्यादा है। विशेषज्ञों के मुताबिक मधुमेह से पीड़ित करीब 40 फीसदी मरीजों को क्रॉनिक किडनी डिसीज (सीकेडी) होने का खतरा रहता है और उच्च रक्त चाप से पीड़ित करीब 20 फीसदी लोगों को किडनी संबंधी बीमारी होने का गंभीर खतरा रहता है। देश की करीब 10 फीसदी आबादी किसी न किसी तरीके से सीकेडी से पीड़ित है।

विज्ञापन


अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. एस.के.अग्रवाल ने बताया कि मधुमेह पीड़ित रोगियों को सबसे ज्यादा किडनी संबंधी बीमारी का खतरा रहता है।
विज्ञापन


किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित करीब 15 फीसदी लोग क्रोनो नेफ्रोलॉराइटिस से और 20 फीसदी मरीज उच्च रक्त चाप से पीड़ित होते हैं। यदि इन मरीजों का शुरुआत में ही इलाज शुरू कर दिया जाए तो सीकेडी के 60 से 70 प्रतिशत को बीमारी से बचाया जा सकता है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि वैसे मरीज जिनमें किडनी संबंधी बीमारी का लक्षण न हो उन्हें निरंतर अंतराल पर यूरिन प्रोटीन और ब्लड क्रिएटिन जांच कराते रहना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

मरीज बीमारी के चौथे अथवा पांचवें स्टेज में इलाज के लिए पहुंचते हैं

Ten percent population infected with kidney-related disease in india
डायबटीज - फोटो : getty images

वैसे मरीज जिनके परिवार में किडनी संबंधी बीमारी के मरीज हों अथवा जिनकी उम्र 60 वर्ष या इससे अधिक हो उन्हें जांच जरूर करानी चाहिए। जांच नहीं कराने की वजह से ही किडनी बीमारी से पीड़ित ज्यादातर मरीज बीमारी के चौथे अथवा पांचवें स्टेज में इलाज के लिए डॉक्टर के पास पहुंचते हैं।

एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. डी. भौमिक ने बताया कि चौथे और पांचवें स्टेज में आने वाले 50 फीसदी से ज्यादा मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण अथवा डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है। डायलिसिस निरंतर करानी पड़ती है और महंगी भी होती है, इसलिए मरीज की आर्थिक स्थिति खराब होती चली जाती है।

सीकेडी मरीजों के इलाज में हृदयाघात और ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों से ज्यादा खर्च होता है। डॉ.भौमिक ने बताया कि डायलिसिस कराने के चक्कर में ज्यादातर मरीजों को अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा बेचना पड़ता है।

एम्स और आईसीएमआर मिलकर कर रहे अध्ययन

Ten percent population infected with kidney-related disease in india

एम्स और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) एकसाथ देश में क्रॉनिक किडनी डिसीज के मरीजों की वास्तविक संख्या का अंदाजा लगाने और मरीजों की प्रकृति पर अध्ययन कर रहा है। इस अध्ययन में करीब छह हजार लोगों को शामिल किया गया है।

अध्ययन में दिल्ली, जयपुर, हैदराबाद, चेन्नई, भोपाल, गोहाटी, कोलकाता और मुंबई को शामिल किया गया है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि दो वर्ष से यह अध्ययन चल रहा और करीब सवा साल और चलना है।

इसके बाद अध्ययन की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद इस बीमारी के लिए नई पॉलिसी तैयार की जा सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed