सुपरटेक विवाद: घर की जगह मिल रहे ऑप्शन
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सुपरटेक में फ्लैट खरीदने वालों को तो एक घर चाहिए था, लेकिन उन्हें ऑप्शन मिले हैं और इससे बायर्स की उलझन बढ़ गई है। सुपरटेक से हुए समझौते की तीनों शर्तों में से किसी एक को चुनकर 30 अप्रैल तक बायर्स को जवाब देना है। इसके बाद ऑप्शन को बदला नहीं जा सकेगा।
परेशानी ये है कि हर रास्ते में कोई न कोई अड़चन है। ऐसे में बायर्स समझ नहीं पा रहे हैं कि कौन सा रास्ता बेहतर होगा।
दरअसल, सुपरटेक के सीएमडी आरके अरोड़ा के साथ 19 अप्रैल को फ्लैट बायर्स की सात घंटे चली मैराथन मीटिंग में बायर्स के सामने तीन ऑप्शन रखे गए।
हर ऑप्शन में है पंगा
पहला ऑप्शन, हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक 14 फीसदी ब्याज सहित पैसा वापस लेने का है।
दूसरा सुपरटेक के किसी और प्रोजेक्ट में शिफ्ट होने और तीसरा सुप्रीम कोर्ट से आदेश आने तक इंतजार करने का है। इन शर्तों ने बायर्स की नींद हराम कर दी है। बायर्स की मानें, तो तीनों ही ऑप्शन के पीछे कुछ अड़चनें हैं।
अगर बायर्स 14 प्रतिशत ब्याज सहित पैसा वापस लेते हैं तो जो बढ़ी हुई राशि उन्हें मिलेगी, उससे भी ज्यादा राशि सर्विस टैक्स व अन्य करों में चली जाएगी। ऐसे में अब तक जमा किए पैसों से भी कम हाथ आएंगे।
खरीदारों ने भी दिखाया गुस्सा
अगर खरीदार सुपरटेक के किसी और प्रोजेक्ट में शिफ्ट होते हैं तो फ्लैट की कीमत मौजूदा बाजार भाव पर देनी होगी, जबकि एपेक्स और सियान टावर में फ्लैट की कीमत वही रहेगी.. जितने में तय हुई थी।
तीसरा ऑप्शन सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक इंतजार करने का है। इसमें भी डर ये है कि फैसला सुपरटेक के विरुद्ध गया, तो खरीदार क्या करेंगे।
एपेक्स में फ्लैट खरीदने वाली मीनाक्षी का कहना है कि ऑप्शन का चयन बेहद मुश्किल है। हमें तो फ्लैट चाहिए, लेकिन अब हमें ऑप्शन दे दिए गए हैं। समझ में नहीं आ रहा कि किस ऑप्शन को चुनें। धीरेंद्र शर्मा ने कहा कि फ्लैट के लिए पैसा दिया था और फ्लैट ही चाहिए। उन्होंने बताया कि अगले सप्ताह वे हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे।
बायर्स में भी कई गुट!
सुपरटेक से मिले तीनों ऑप्शन में से एक पर आम सहमति बनाने के लिए रविवार को सेक्टर 93 ए स्थित साइट के सामने पार्क में फ्लैट खरीदारों ने बैठक की। ज्यादातर बायर्स पहले और तीसरे विकल्प के पक्ष में है।
कुछ लोग पैसे वापस लेने का मन बना रहे हैं, तो कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार करना चाहते हैं। खरीदार किसी और प्रोजेक्ट में शिफ्ट होने का मन नहीं बना पा रहे।
बायर्स का कहना है कि बिल्डर ने तीन ऑप्शन में से किसी एक को चुनने के लिए 30 अप्रैल तक का समय इसलिए दिया है, क्योंकि इस दौरान वह हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से स्थगन आदेश ला सके।
एमरॉल्ड कोर्ट के काम में असर
एक विकल्प चुन लेने वाले बायर के पास ऑप्शन बदलने का मौका नहीं होगा। सुपरटेक इस सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट जाने की बात पहले ही कह चुका है।
हाईकोर्ट के आदेश का लाभ एमरॉल्ड कोर्ट के निवासियों को मिलने लगा है। वहां के निवासी बेसमेंट में सीवरेज के लीक होने, खराब सड़कों व सेंट्रल पार्क मेनटेन न होने से परेशान थे। अब तेजी से काम चल रहा है।
इसे निवासियों की नाराजगी दूर करने की कोशिश माना जा रहा है। निवासी आरपी टंडन ने बताया कि विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं, मगर इसे हाईकोर्ट के आदेश के असर से नहीं जोड़ा है।