इस तरह गंभीर राजनीति की ओर केजरीवाल ने बढ़ाया कदम
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जिसका अनुमान था वही हो रहा है। दिल्ली के चुनाव में आम आदमी पार्टी को ऐतिहासिक बहुमत मिलने से देश की राजनीति को नई दिशा व दशा की ओर ले जाने के अलावा काफी कुछ नया होने का सिलसिला जारी है।
विपक्षी दलों का इस चुनाव में सफाया होने के बाद किरण बेदी व माकन का सहयोग नई सरकार में लेने की बात कहकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गंभीर राजनीति की तरफ कदम बढ़ाने का इशारा किया।
दिल्ली में जाति धर्म की राजनीति समाप्त करने व भ्रष्टाचार मुक्त पहला राज्य बनाने सहित कई मुद्दे छूकर उन्होंने स्वस्थ राजनीति की तरफ कदम उठाने के संकेत दिए हैं।
कांग्रेस की बुरी हार पर एक शब्द भी नहीं बोला
केजरीवाल ने शनिवार को विपक्षी दलों पर उस तरह का हमला नहीं बोला जैसा कि कोई राजनैतिक दल चुनाव जीतने के बाद विपक्ष की करारी हार के बाद करता आया है। भाजपा अभी तक कांग्रेस की लोकसभा चुनाव में हार पर हर सभा में चटकारा ले रही थी लेकिन केजरीवाल ने भाजपा कांग्रेस की बुरी हार पर एक शब्द भी नहीं बोला। उल्टा उन्होंने भाजपा के जीते हुए तीनों विधायकों को भी अपना ही विधायक कहा।
ऐसा भी पहली बार देखने को मिला कि उन्होंने भाजपा व कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों का मार्गदर्शन सरकार व प्रशासन चलाने के लिए लेने की बात कही। अगर साफ शब्दों में कहें तो पहले भाजपा व कांग्रेस को सीधा चोर बताने वाले केजरीवाल इस बार पूर्ण बहुमत मिलने पर पूरी तरह से दिल्ली को जोड़ने व बढ़ाने की बात कहते दिखे।
दरअसल, अपने 49 दिनों के पूर्व के कार्यकाल के कड़वे अनुभव व लिए गए सबक का असर आज उनकी पूर्ण समर्थन वाली सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में दिखा। उन्होंने साफ किया सरकारी कार लेंगे लेकिन लाल बत्ती व हूटर नहीं होगा, घर लेंगे लेकिन ज्यादा बड़ा नहीं, काम होंगे लेकिन टाइम बाउंड नहीं।
कहां पांच साल दिए हैं जनता ने सारे काम करेंगे
इसके बाद भी उन्होंने मीडिया को नसीहत दे डाली कि इन मुद्दों को समय में न बांधे, क्योंकि जनता ने उन्हें पांच साल दिए हैं। ज्ञात हो कि पिछली सरकार में भी वीआईपी कल्चर न रखने पर मीडिया ने मकान व गाड़ी पर केजरीवाल को घेरा था और इसके बाद चुनाव में विपक्ष खासकर भाजपा ने सरकार छोड़कर भागने सहित इन सारी कमियों को विज्ञापन के माध्यम से ‘आप’ को घेरा था। इस बार उन्होंने सब कुछ साफ-साफ कर दिया।
हालांकि इस भाषण में कुछ मुद्दों पर उन्होंने मुख्यमंत्री बन जाने के बावजूद एक एक्टिविस्ट के रूप में भी खुद को दर्शाया। शायद यह पहले सीएम होंगे जो विद आउट पोर्टफोलियो हैं। कोई रिश्वत मांगे तो सेटिंग कर लेना और रिकॉर्डिंग कर भेज देना भी वही रूप माना जा रहा है।
पूर्ण राज्य का दर्जा मिले बिना दिल्ली की जनता के लिए काम करना काफी मुश्किल है, इसके संकेत उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंदाज में ही दिए। शाहदरा रैली में जिस तरह मोदी ने कहा था कि हमारी मास्टरी सरकार चलाने की है तो हमें सरकार चलाने दो और उनकी मास्टरी धरना-प्रदर्शन की है उन्हें वही करने दो। लगभग उसी अंदाज में आज केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली चलाने की जिम्मेदारी दिल्ली वालों पर छोड़ दीजिए, प्रधानमंत्री जी आप देश चलाइए।