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Delhi: बंद बिजली कनेक्शनों पर बांट दी 42.26 करोड़ रुपये की सब्सिडी, 400 यूनिट सीमा का आधार भी स्पष्ट नहीं
Sat, 08 Aug 2026 07:48 AM IST
Vijay Singh Pundir
संदीप वर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
संदीप वर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Sat, 08 Aug 2026 07:48 AM IST
सार
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, 0 से 200 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले करीब 30 लाख उपभोक्ताओं को सालाना औसतन लगभग 6,000 रुपये की सब्सिडी मिली, जबकि 200 यूनिट से अधिक खपत वाले करीब 16.60 लाख उपभोक्ताओं को औसतन 10,000 रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली।
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बिजली (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
दिल्ली में सस्ती बिजली के सरकारी दावों के बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने बिजली सब्सिडी के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2022-23 की अवधि से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार, सब्सिडी का लाभ वास्तविक और पात्र उपभोक्ताओं तक सीमित करने के लिए पर्याप्त जांच नहीं की गई। कैग ने पाया कि लंबे समय से शून्य बिजली खपत वाले कनेक्शनों पर भी सरकार ने 42.26 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी।
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रिपोर्ट के मुताबिक, 0 से 200 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले करीब 30 लाख उपभोक्ताओं को सालाना औसतन लगभग 6,000 रुपये की सब्सिडी मिली, जबकि 200 यूनिट से अधिक खपत वाले करीब 16.60 लाख उपभोक्ताओं को औसतन 10,000 रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली। यानी अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को कम खपत वालों की तुलना में करीब 70 प्रतिशत अधिक सब्सिडी मिली। कैग ने यह भी सवाल उठाया कि 400 यूनिट तक सब्सिडी देने की सीमा तय करने के पीछे सरकार के रिकॉर्ड में ठोस आधार या स्पष्ट औचित्य नहीं है। इसके चलते करीब 80 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ता सब्सिडी के दायरे में आ गए।
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बकाया बढ़ा, टैरिफ शॉक का खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, 2014-15 के बाद दिल्ली में बिजली टैरिफ में संशोधन नहीं हुआ। बिजली खरीद की लागत और उपभोक्ताओं से वसूली के बीच अंतर बढ़ने से डिस्कॉम की नियामक परिसंपत्तियां बढ़ती गईं। इनकी राशि 2019-20 के 9,063 करोड़ से बढ़कर 31 मार्च 2021 तक 27,200.37 करोड़ हो गई। कैग ने चेताया कि इस अंतर का समय पर समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में उपभोक्ताओं पर भारी टैरिफ बढ़ोतरी का बोझ पड़ सकता है या सरकार को राजकोष से बड़ी रकम देनी पड़ सकती है।
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