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निजी अस्पतालों पर कसी नकेल: 28 दिन के इलाज का बिल आठ लाख, सरकार का चला डंडा, लौटाई रकम
Wed, 13 Oct 2021 12:12 AM IST
पूजा त्रिपाठी
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Wed, 13 Oct 2021 12:12 AM IST
सार
जानकारी के अनुसार दिल्ली के समयपुर बादली निवासी 35 वर्षीय नीरज गुप्ता बीते 10 मई को कोरोना संक्रमित हुए थे। दो दिन जीटीबी अस्पताल में रहने के बाद उनका ऑक्सीजन स्तर लगातार गिर रहा था जिसके बाद उन्हें उत्तरी दिल्ली के संतम अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां सात जून को उन्हें डिस्चार्ज किया गया। 28 दिन की अवधि में उनका बिल आठ लाख 20 हजार रुपये का बना जिसमें छह लाख रुपये का भुगतान मेडिकल इंश्योरेंस के जरिए हुआ।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
प्राइवेट अस्पतालों की बेहिसाब महंगाई किसी से छिपी नहीं है। लाखों रुपये के बिलों का भुगतान मरीजों को करना ही पड़ता है। इस मनमानी को रोकने के लिए बकायदा सरकारी सिस्टम बना हुआ है। कितने लोगों को यह सिस्टम राहत दे पाया है? इसके आंकड़े तक मौजूद नहीं है लेकिन अब पहली बार प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का मामला सामने आया है। दिल्ली सरकार ने कोरोना मरीजों के लिए जिस कमेटी का गठन किया था उसने न सिर्फ अस्पताल को नोटिस भेजा है बल्कि मरीज को एक लाख रुपये से भी ज्यादा वापस करवाया।
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जानकारी के अनुसार दिल्ली के समयपुर बादली निवासी 35 वर्षीय नीरज गुप्ता बीते 10 मई को कोरोना संक्रमित हुए थे। दो दिन जीटीबी अस्पताल में रहने के बाद उनका ऑक्सीजन स्तर लगातार गिर रहा था जिसके बाद उन्हें उत्तरी दिल्ली के संतम अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां सात जून को उन्हें डिस्चार्ज किया गया। 28 दिन की अवधि में उनका बिल आठ लाख 20 हजार रुपये का बना जिसमें छह लाख रुपये का भुगतान मेडिकल इंश्योरेंस के जरिए हुआ। जबकि बाकी रकम का भुगतान उन्होंने किया।
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नीरज बताते हैं कि घर आने और स्वस्थ होने के बाद जब उन्होंने अपने मेडिकल बिल की जांच करना शुरु की तो उन्हें काफी हैरानी हुई क्योंकि जब वे अस्पताल में भर्ती थे तो उन्होंने बोर्ड पर देखा था कि फिजियोथैरेपी की प्रति विजिट 500 रुपये है लेकिन उनके बिल में यही चार्ज दो हजार रुपये था। दिन भर में केवल एक बार फिजियोथैरेपिस्ट उन्हें देखने आता था लेकिन चार्ज दो विजिट (चार हजार रुपये) लगा था। उन्होंने सिर्फ फिजियोथैरेपी के लिए ही 56 हजार रुपये का भुगतान किया था। जबकि कोरोना महामारी के उपचार प्रोटोकॉल में फिजियोथैरेपी शामिल नहीं है। अस्पताल के स्तर पर एक परीक्षण के रुप में फिजियोथैरेपी दी जा रही थी। इसके अलावा 18 हजार के पैकेज में मेडिसिन, पैथोलॉजी का शुल्क कई गुना अधिक था। इसी तरह मेडिकल बिल में 45 हजार रुपये सिर्फ डिस्पोजेबल के लिए रखे गए।
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पहले किया इनकार, फिर समझौता के लिए बुलाया
नीरज ने बताया कि मेडिकल बिल को लेकर पहले उन्होंने अस्पताल से संपर्क किया था लेकिन वहां उनसे किसी ने बात नहीं की। इसके बाद उन्होंने उत्तरी दिल्ली के जिला प्रशासन को शिकायत दर्ज कराई। 13 जुलाई को दी शिकायत पर 27 सितंबर को सुनवाई हुई और अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दए गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल बुलाया और काफी माथापच्ची के बाद पहले पहले 1.10 लाख, फिर 1.50 लाख और बाद में 1.60 लाख रु,पये वापस करने पर सहमति बनी और उन्हें छह अक्तूबर को अस्पताल ने 1.60 लाख रुपये का चैक उपलब्ध कराया।
अस्पताल से मांगा है जवाब
सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के साथ कार्य कर रहे शालीन मित्रा ने बताया कि इस मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन से भी जवाब तलब किया गया है। अस्पताल से पूछा है कि मरीज से आखिर क्यों ओवर चार्ज किया गया?
यहां कर सकते हैं शिकायत
कोरोना मरीजों को लेकर दिल्ली सरकार ने बकायदा एक कमेटी बनाई है। साथ ही जिला प्रशासन को भी इन मामलों पर संज्ञान लेने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति ओवरचार्ज को लेकर शिकायत करना चाहत है तो वह सभी दस्तावेजों के साथ अपनी शिकायत संबंधित जिला प्रशासन को भेज सकता है। जिस क्षेत्र में अस्पताल आता है वहां के प्रशासन को भी शिकायत की जा सकती है।