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आठ साल के बंधक मजदूर की मार्मिक कहानी

Sat, 11 Oct 2014 04:14 PM IST
Updated Sat, 11 Oct 2014 04:14 PM IST
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story of a eight year old boy.

बात चौदह साल पहले की है। पता चला कि बिहार के इंजीनियर साहब हैं जिन्होंने एक बच्चे को अपने घर का बंधक नौकर बना रखा है।

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चूंकि इंजीनियर साहब इलाके के प्रतिष्ठित व्यक्ति थे और लोग उनकी इज्जत करते थे इसलिए, किसी ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठाई।

किसी तरह यह बात बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था बचपन बचाओ आंदोलन तक पहुंची। संस्था ने तुरंत ही इस मामले में पहल की और बच्चे को आजाद कराने की मुहिम शुरू हुई।

जल्द ही बच्चा आजाद हुआ। सुमन महतो नामक आठ साल का यह बच्चा बेहद गरीब था। आजाद होने के बाद भी उसके सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी और उसे सहारा देने वाला कोई नहीं था।
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संस्था ने न सिर्फ बच्चे को आजाद कराया बल्कि उसका भविष्य भी संवारा। आठ साल के सुमन महतो की उम्र आज 22 साल है। बेगारी के लिए मजबूर किया गया वही बच्चा आज ग्राफिक डिजायनर है।
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बुखार में भी नहीं रुके उसके कदम

story of a eight year old boy.

सुमन आजकल बीमार चह रहा है। शुक्रवार को उसे पता चला कि बचपन बचाओ संस्‍था के कैलाश सत्यार्थी को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक शांति का नोबेल पुरस्कार मिला है, तो वह खुद को रोक नहीं पाया।

बुखार के बावजूद उसने दिल्ली आने का फैसला किया और सीधे कालकाजी पहुंचा। यही वह इलाका है जहां बचपन बचाओ आंदोलन का कार्यालय है।

सुमन वहां पहुंचते ही कैलाश के गले लग गया। इस खुशी को वह जितनी जल्दी हो सके उस व्यक्ति के साथ बांटना चाहता था जिसकी वजह से आज वह एक सम्मानजनक जीवन जी रहा था।

बता दें कि कैलाश सत्यार्थी को पाकिस्तान की युसूफ जलाला के साथ इस वर्ष का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। बचपन बचाओ आंदोलन उनके द्वारा चलाई जाने वाली एक गैर सरकारी संस्‍था (एनजीओ) है।

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