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दिल्ली पुलिस का दावा, दंगों में पैसे देकर करवाया गया था भाषण और हवन

Fri, 25 Sep 2020 05:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोतम वर्मा, नई दिल्ली
पुरुषोतम वर्मा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 25 Sep 2020 05:11 AM IST
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Speech and Havan was done by paying money in riots says delhi police chagresheet
delhi violence - फोटो : जी पॉल

दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोपियों ने दंगों के लिए लोगों को भड़काने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी। इन्होंने सारे हथकड़े अपनाए थे। इन्होंने वृंदावन से संत युवराज को बुलाया।

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इन्होंने संत युवराज से मुस्लिम टोपी पहनाकर भाषण दिलवाए और हवन करवाया। आरोपियों ने संत युवराज को हर एक भाषण के 15 हजार रुपये और हवन के भी 15 हजार रुपये दिए थे। संत युवराज ने भी भड़काऊ भाषण दिए थे।
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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिल्ली दंगों की साजिश रचने के मामले में 16 सितंबर को कोर्ट दाखिल चार्जशीट में ये बातें कही है। संत युवराज ने अपने बयान में कहा है कि गांव राधेरा, मथुरा निवासी संत युवराज आश्रम, वृंदावन में रहता हूं। वह संत युवराज सेवा ट्रस्ट व संत युवराज हिंदू सेना ट्रस्ट के नाम से दो ट्रस्ट चलाने के अलावा भारतीय जनजागृति पार्टी के नाम से राजनीतिक पार्टी चलाते हैं।
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सोशल मीडिया पर हिंदू सेना के नाम से पोस्ट आते रहते हैं। संस्था हिंद आर्मी में इनाम खान महासचिव था। जनवरी, 20 में इनाम खान उसे शाहीनबाग में सीएए व एनसीआर के विरोध में चल रहे प्रदर्शन में ले आया। यहां उसे शाहीन कौसर व डीएस बिंद्रा से मिलवाया।

धरने को सेकुलर नाम देने के लिए उन्हें शाहीन कौसर ने टोपी पहना दी। हवन के बाद संत युवराज ने सीलमपुर, निजामद्दीन, जामा मजिस्द आदि कई जगहों पर भाषण दिए। उन्हें हर भाषण के 15-15 हजार रुपये मिले। पैसे शाहीन कौसर व डीएस बिंद्रा ने दिए थे।

फरवरी में उसे हवन के लिए बुलाया गया और मुस्लिम टोपी पहनाकर उससे हवन करवाया गया। दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में ये भी दावा किया कि हवलदार रतनलाल की मौत के गवाह सिपाही सुनील है। दयालपुर थाने में तैनात सिपाही सुनील का कहना है कि प्रदर्शनकारी अलर्ग-अलग धर्म के लोगों को बहका कर लाते थे और उनसे भड़काऊ भाषण दिलवाते थे।
 

खुरेजी व शाहीनबाग में लंगर शुरू कर धरनास्थल बनाया गया था

सीएए व एनसीआर के विरोध में पहले लंगर शुरू किए गए थे। जब वहां लोग एकत्रित होने शुरू हो गए तो लंगर को धरनास्थलों में बदला दिया गया था। दक्षिण भारत की एक राजनीतिक पार्टी से जुड़े एडवोकेट डीएस बिंद्रा ने ज्यादातर जगहों पर लंगर शुरू किए थे।

डीएस बिंद्रा ने धरना स्थलों के आयोजकों व समर्थकों की आर्थिक सहायता भी की थी। इसके अलावा ज्यादातर जगहों पर जो लोग धरनों में भाग ले रहे थे वह धरनास्थल के पास ही किराए पर मकान लेकर रहने लग गए थे।

दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में कहा है कि चांद बाग में रहने वाले एक युवक के गवाह के तौर पर चार अप्रैल को कोर्ट के सामने बयान दर्ज किए गए हैं। युवक खान ने अपने बयानों में कहा है कि 15 जनवरी के आसपास चांद बाग में लंगर शुरू हुआ था। मौके पर जाकर पता लगा कि लंगर पुराने मुस्ताबाबाद के सुलेमान सिद्दकी और डीएस बिंद्रा ने शुरू किया है।

दो दिन बाद इन लोगों ने माइक से कहा कि यहां पर धरना शुरू कर दिया गया है। यहां पर डीएस बिंद्रा ने भड़काऊ भाषण देते हुए कि ये सरकार भी मुसलमानों के साथ वहीं करेगी तो 1984 सिखों के साथ हुआ था। इनके भाषण से प्रभावित होकर वह, उपासना, शादाब व रविश के साथ धरनास्थल को संभालने लगे।

दिल्ली पुलिस ने एक गवाह माइक (कोड नेम) के बयान कोर्ट में 24 मार्च को कराए। इस गवाह ने अपने बयानों में कहा है कि वह खुरेजी पेट्रोल पंप के पास इशरत जहां, स्थानीय नेता खालिद सैफी व अन्य लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। यहां पर हर रोज भड़काऊ भाषण देते थे।

यहां पर जामिया व अन्य जगहों के लोग आने लग गए। कुछ दिनों में धरनास्थल पर हजारों लोगों का जुटना शुरू हो गया। ऐसे में लोगों ने धरनास्थल के आसपास किराए पर मकान लेकर रहना शुरू कर दिया। इस तरह लोग शाहीनबाग में भी किराए पर मकान व कमरा लेकर रहने लग गए थे।

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