जंतर-मंतर पर गूंजी आंदोलनों की आवाज
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जंतर मंतर पर शुक्रवार का दिन अलग-अलग आंदोलनों का गवाह बना। देश भर से आए आम लोगों ने अपने हक में आवाज बुलंद की। सभी की कोशिश अपनी धमक सत्ता के गलियारे पर पहुंचाने की थी।
नेशनल कॉनफेडरेशन ऑफ दलित आर्गेनाइजेशन (नैक्डोर) ने दलितों और आदिवासी की आवाज उठाई। डॉक्टर भीम राव अंबेडकर की पुण्यतिथि के एक दिन पहले रामलीला मैदान में रैली हुई। इसके बाद बड़ी संख्या में देश भर से आए दलित, पिछडे़ व आदिवासी समाज के लोगों ने जंतर-मंतर के लिए मार्च किया।
इस मौके पर नैक्डोर के चेयरमैन अशोक भारती ने जहां स्वच्छ भारत अभियान के तहत सभी देशवासियों के झाड़ू उठाने के प्रधानमंत्री के आह्वान की तारीफ की वहीं, दलित समाज के लोगों के हाथ में कलम पकड़ाने की जरूरत भी बताई। बुंदेलखंड से आए पूर्व मंत्री प्रदीप जैन ने कहा कि बुंदेलखंड का दलित व आदिवासी समाज पूरी तरह उपेक्षित है। महारैली के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 281 मांगों का एक ज्ञापन भी सौंपा गया।
इन प्रदर्शनों की भी गवाह बनी दिल्ली
सीटू की अगुवाई में प्रदर्शन
जंतर-मंतर पर सीटू की अगुवाई में वंचितों के हक की आवाज उठाई गई। इस मौके पर केंद्र सरकार द्वारा श्रम कानूनों में हो रहे बदलावों को मजदूर विरोधी बताया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि श्रम कानूनों में बदलाव से मजदूरों पर बेहद बुरा असर पड़ेगा।
फैक्ट्री कानून, ठेका मजदूरों के लिए बने कानूनों व अप्रेंटिस कानून में मालिक के पक्ष में बदलाव हो रहे हैं। इन सबसे बेरोजगारी बढ़ेगी और मजदूरों की बड़ी संख्या श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएगी। प्रदर्शन में बीएमएस, इंटक, एटक, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एक्टू समेत कई संगठनों ने हिस्सा लिया।
जानवरों को बचाने के लिए कैंडल जलाई
भारतीय पशु संरक्षण संगठनों के महासंघ ने पेटा व दूसरे कई संगठनों के साथ जानवरों को बचाने के लिए जंतर-मंतर पर मोमबत्ती जलाई और मूक प्रदर्शन किया। इस मौके पर बताया गया कि नेपाल में पूजा और धर्म के नाम पर बड़ी संख्या में पशु बलि दी जाती है।
इनमें बड़ी संख्या में भारत से पशुओं की तस्करी होती है। इस दौरान प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन दिया गया। इस मौके पर मांग की गई कि पशुओं की तस्करी रोकने के लिए कड़ा कानून बनाएं।
बाबरी मस्जिद बनाने में लिए प्रदर्शन
आल इंडिया बाबरी मस्जिद रीबिल्डिंग कमेटी के बैनर तले प्रदर्शन हुआ। इसमें मांग की गई कि बाबरी मस्जिद को दोबारा बनाया जाए। साथ ही छह दिसंबर को काले दिवस के तौर पर मनाने का ऐलान किया गया। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया।