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दिवाली 2018: दिल्ली-एनसीआर में पहले से ही स्मॉग का कहर, हवा में भरा जहर, ऐसे करें बचाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Tue, 06 Nov 2018 03:47 AM IST
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प्रदूषण
- फोटो : अमर उजाला
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दिवाली से पहले सोमवार को आसमान में स्मॉग की चादर छा गई, जिससे आबोहवा और खराब हो गई। सुबह के समय दृश्यता कम होने से वाहनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लग गया। जिले में वायु गुणवत्ता सूचकांक सोमवार शाम को बढ़कर 408 प्रति घनमीटर यानी बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया। लोगों की आंखों में जलन महसूस हुई। सांस के रोगियों की परेशानी बढ़ गई है। दिवाली पर आतिशबाजी छोड़ने से हालत और अधिक बिगड़ सकते हैं।
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पुआल, कूड़ा और कोयला जलाने पर पूर्णतया रोक नहीं लगने पर सोमवार को दिवाली से पूर्व धुआं और धूल ने स्मॉग का रूप धारण कर लिया। इससे सांस और अस्थमा के रोगियों की परेशानी बढ़ गई। साथ ही आंखों में जलन और त्वचा रोग का खतरा बढ़ गया। स्मॉग में बनी सफेद चादर के चलते सुबह के समय दृश्यता कम हो गई, जिसके चलते वाहनों की गति कम हो गई और चालकों को लाइट जलाकर चलना पड़ा।
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जानकारी के अनुसार स्मॉग धुंध, कोहरा और धुंआ का मिश्रण है। इसको विशेषज्ञों ने स्मॉग (स्मॉक और फॉग का संयुक्त) नाम दिया है। यह कोहरे और धुंध से 10 गुना ज्यादा खतरनाक है। इससे हर वर्ग के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। हालांकि इससे बचाव के लिए लोगों ने मास्क और चश्मा आदि का प्रयोग किया।
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मौसम विशेषज्ञों के अनुसार तेज हवा चलने के बाद ही स्मॉग से छुटकारा मिलने की उम्मीद है। वहीं, पर्यावरण अधिकारी और जिला प्रशासन लोगों से पुआल, कूड़ा न जलाने, निर्माण कार्य न करने और इस बार धुआं रहित आतिशबाजी का प्रयोग कम करने की लोगों से अपील की। मौसम वैज्ञानिक विवेकराज का कहना है कि बारिश होने से स्मॉग की चादर हट सकती है। फिलहाल बारिश की संभावना बहुत कम है और अब लगातार तापमान में गिरावट और ठंड बढ़ने के भी आसार बन रहे हैं।
प्रदूषण खतरे में
जानकारी के अनुसार तेज हवा चलने के कारण 30 और 31 अक्तूबर के बाद प्रदूषण में कमी आई थी, लेकिन इसके बाद भी प्रदूषण स्तर सामान्य से अधिक चलता रहा। वायु गुणवत्ता सूचकांक शनिवार को शाम चार बजे 333 प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था, जो सोमवार को बढ़कर 408 तक पहुंच गया।
स्मॉग से ये होती है परेशानी
- मार्निंग वाक करने वालों को स्वच्छ वातावरण न मिलना।
- आंखों में जलन, सूजन और पलकों में इंफेक्शन होना।
- स्किन एलर्जी, जलन और खुजली जैसी शिकायत आदि।
- हाईबीपी, हृदय रोगियों के साथ स्वांस रोगियों को भी होती है परेशानी।
जानकारी के अनुसार तेज हवा चलने के कारण 30 और 31 अक्तूबर के बाद प्रदूषण में कमी आई थी, लेकिन इसके बाद भी प्रदूषण स्तर सामान्य से अधिक चलता रहा। वायु गुणवत्ता सूचकांक शनिवार को शाम चार बजे 333 प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था, जो सोमवार को बढ़कर 408 तक पहुंच गया।
स्मॉग से ये होती है परेशानी
- मार्निंग वाक करने वालों को स्वच्छ वातावरण न मिलना।
- आंखों में जलन, सूजन और पलकों में इंफेक्शन होना।
- स्किन एलर्जी, जलन और खुजली जैसी शिकायत आदि।
- हाईबीपी, हृदय रोगियों के साथ स्वांस रोगियों को भी होती है परेशानी।
ऐसे करें बचाव
स्मॉग की चादर छंटने में अभी समय लग सकता है। वर्षा हो जाने या तेज हवा चलने से इसका प्रभाव कम होगा। वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. एसएन राय के अनुसार ऐसे में लोगों को आंखों पर चश्मा और मास्क लगाकर निकलना चाहिए।
स्मॉग लोगों की सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है। इससे बचाव के लिए लोगों को मुंह पर कपड़ा ढककर बाहर निकलना चाहिए। छोटे बच्चे व सांस के मरीजों को इस मौसम में कम से कम बाहर निकलना चाहिए। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ
प्रदूषण की प्रतिदिन मॉनीटरिंग की जा रही है। वातावरण में प्रदूषण बहुत ज्यादा है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। प्रदूषण को बढ़ने से बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। - जीएस श्रीवास्तव, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
स्मॉग की चादर छंटने में अभी समय लग सकता है। वर्षा हो जाने या तेज हवा चलने से इसका प्रभाव कम होगा। वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. एसएन राय के अनुसार ऐसे में लोगों को आंखों पर चश्मा और मास्क लगाकर निकलना चाहिए।
स्मॉग लोगों की सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है। इससे बचाव के लिए लोगों को मुंह पर कपड़ा ढककर बाहर निकलना चाहिए। छोटे बच्चे व सांस के मरीजों को इस मौसम में कम से कम बाहर निकलना चाहिए। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ
प्रदूषण की प्रतिदिन मॉनीटरिंग की जा रही है। वातावरण में प्रदूषण बहुत ज्यादा है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। प्रदूषण को बढ़ने से बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। - जीएस श्रीवास्तव, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड