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स्मार्ट सिटी : ऐसे फंसाऊ ट्रैफिक सिस्टम में तो पिछड़ना ही था
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sat, 30 Jan 2016 12:54 AM IST
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स्मार्ट सिटी की दौड़ से गाजियाबाद यूं ही नहीं बाहर हुआ। केंद्र सरकार के मानकों पर गाजियाबाद खरा ही नहीं उतर पाया, बल्कि इससे बहुत पीछे रह गया। इनमें कई ऐसे बिंदु हैं जिनमें शहर पिछड़ गया है।
इनमें एक गाजियाबाद का ट्रैफिक सिस्टम भी है। स्मार्ट सिटी की गाइड लाइन के मुताबिक शहर का ट्रैफिक स्मूद होना चाहिए। शहर के एक छोर से दूसरे पर जाने में 25 मिनट से ज्यादा नहीं लगने चाहिए, लेकिन यहां खस्ताहाल ट्रैफिक और जाम में घंटों खराब होने की हकीकत किसी से छिपी नहीं है।
कारण कई हैं, लेकिन सूत्रों की मानें तो ट्रैफिक भी दौड़ में पिछड़ने की एक बड़ी वजह है। पहले फेज में ऐसे शहरों को तवज्जो दी गई, जो ट्रैफिक, वाटर सप्लाई समेत जन सुविधाओं में आगे हैं।
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गाजियाबाद के एक छोर से दूसरे पर जाना तो दूर, पुराने शहर से एक किलोमीटर का सफर कर लाइनपार जाने में ही एक घंटा लग जाता है।
गाजियाबाद से साहिबाबाद जाना तो समझो मुसीबत मोल लेना है। गाजियाबाद से आनंद विहार बार्डर तक जाने में एक से डेढ़ घंटे लगते हैं। बीच में कई जाम प्वाइंट को पार करने में दिक्कत होती है, सो अलग।
चौराहों पर ट्रैफिक लाइटें खराब, सड़कें छोटी
गाजियाबाद में चौराहों के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपए तो खर्च कर दिए, लेकिन उन्हें ट्रैफिक के लिहाज से अनुकूल नहीं बनाया गया। शहर के दो-तीन चौराहों को छोड़ दिया जाए तो बाकी पर लगे ट्रैफिक सिग्नल लाइटें खराब हैं।
जेब्रा कॉसिंग और स्टॉप लाइन तक नहीं बनाई गई है। चौराहों पर ऑटो और बसों के रुकने के लिए स्टॉपेज तय नहीं है। बेतरतीब खड़े ऑटो और बसों की वजह से दिनभर जाम की स्थिति रहती है।
हापुड़ तिराहे से राकेश मार्ग जाने में लगे 28 मिनट
शुक्रवार को ट्रैफिक की हकीकत जानने के लिए हापुड़ तिराहे से राकेश मार्ग तक का सफर किया गया। कार से इस सफर को पूरा करने में 28 मिनट लग गए। इस दौरान दिल्ली गेट, घंटाघर, चौधरी मोड़, गांधी नगर मोड़, तहसील मोड़ पर जाम जैसी स्थिति रही।
हापुड़ तिराहे से वैशाली तक जाने में एक घंटा पांच मिनट
हापुड़ तिराहे से वैशाली तक पहुंचने के लिए कार से 1:05 घंटे सफर करना पड़ा। मेट्रो निर्माण के चलते इस रूट के कई प्वाइंट पर तो कार की रफ्तार 5-6 किलोमीटर प्रति घंटा से आगे नहीं बढ़ पाई। मेरठ रोड तिराहा, अर्थला, मोहननगर, वसुंधरा रेड लाइट, बीकानेर कट, वैशाली मेट्रो स्टेशन पर जाम के हालात रहे।
कैबिनेट सेक्रेटरी ने वीडियो कांफ्रेंस से जाना हाल
स्मार्ट सिटी की पहली सूची जारी होने के बाद केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के कैबिनेट सेक्रेटरी ने वीडियो कांफ्रेंस कर देश के 97 शहरों के अधिकारियों से वार्ता की।
गाजियाबाद की ओर से नगर आयुक्त अब्दुल समद और निगम के चीफ इंजीनियर आरके मित्तल वीडियो कांफ्रेंस में शामिल रहे। हालांकि गाजियाबाद का नंबर वार्ता में नहीं आ पाया।
अधिकारियों के मुताबिक कैबिनेट सेक्रेटरी ने पहली सूची में जगह न बना पाए शहरों से नए सिरे से तैयारी करने के लिए कहा है। अप्रैल तक दोबारा स्मार्ट सिटी प्रपोजल सबमिट किया जा सकेगा। अगस्त माह में स्मार्ट सिटी की दूसरी सूची जारी की जाएगी।
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इनमें एक गाजियाबाद का ट्रैफिक सिस्टम भी है। स्मार्ट सिटी की गाइड लाइन के मुताबिक शहर का ट्रैफिक स्मूद होना चाहिए। शहर के एक छोर से दूसरे पर जाने में 25 मिनट से ज्यादा नहीं लगने चाहिए, लेकिन यहां खस्ताहाल ट्रैफिक और जाम में घंटों खराब होने की हकीकत किसी से छिपी नहीं है।
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कारण कई हैं, लेकिन सूत्रों की मानें तो ट्रैफिक भी दौड़ में पिछड़ने की एक बड़ी वजह है। पहले फेज में ऐसे शहरों को तवज्जो दी गई, जो ट्रैफिक, वाटर सप्लाई समेत जन सुविधाओं में आगे हैं।
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गाजियाबाद के एक छोर से दूसरे पर जाना तो दूर, पुराने शहर से एक किलोमीटर का सफर कर लाइनपार जाने में ही एक घंटा लग जाता है।
गाजियाबाद से साहिबाबाद जाना तो समझो मुसीबत मोल लेना है। गाजियाबाद से आनंद विहार बार्डर तक जाने में एक से डेढ़ घंटे लगते हैं। बीच में कई जाम प्वाइंट को पार करने में दिक्कत होती है, सो अलग।
चौराहों पर ट्रैफिक लाइटें खराब, सड़कें छोटी
गाजियाबाद में चौराहों के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपए तो खर्च कर दिए, लेकिन उन्हें ट्रैफिक के लिहाज से अनुकूल नहीं बनाया गया। शहर के दो-तीन चौराहों को छोड़ दिया जाए तो बाकी पर लगे ट्रैफिक सिग्नल लाइटें खराब हैं।
जेब्रा कॉसिंग और स्टॉप लाइन तक नहीं बनाई गई है। चौराहों पर ऑटो और बसों के रुकने के लिए स्टॉपेज तय नहीं है। बेतरतीब खड़े ऑटो और बसों की वजह से दिनभर जाम की स्थिति रहती है।
हापुड़ तिराहे से राकेश मार्ग जाने में लगे 28 मिनट
शुक्रवार को ट्रैफिक की हकीकत जानने के लिए हापुड़ तिराहे से राकेश मार्ग तक का सफर किया गया। कार से इस सफर को पूरा करने में 28 मिनट लग गए। इस दौरान दिल्ली गेट, घंटाघर, चौधरी मोड़, गांधी नगर मोड़, तहसील मोड़ पर जाम जैसी स्थिति रही।
हापुड़ तिराहे से वैशाली तक जाने में एक घंटा पांच मिनट
हापुड़ तिराहे से वैशाली तक पहुंचने के लिए कार से 1:05 घंटे सफर करना पड़ा। मेट्रो निर्माण के चलते इस रूट के कई प्वाइंट पर तो कार की रफ्तार 5-6 किलोमीटर प्रति घंटा से आगे नहीं बढ़ पाई। मेरठ रोड तिराहा, अर्थला, मोहननगर, वसुंधरा रेड लाइट, बीकानेर कट, वैशाली मेट्रो स्टेशन पर जाम के हालात रहे।
कैबिनेट सेक्रेटरी ने वीडियो कांफ्रेंस से जाना हाल
स्मार्ट सिटी की पहली सूची जारी होने के बाद केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के कैबिनेट सेक्रेटरी ने वीडियो कांफ्रेंस कर देश के 97 शहरों के अधिकारियों से वार्ता की।
गाजियाबाद की ओर से नगर आयुक्त अब्दुल समद और निगम के चीफ इंजीनियर आरके मित्तल वीडियो कांफ्रेंस में शामिल रहे। हालांकि गाजियाबाद का नंबर वार्ता में नहीं आ पाया।
अधिकारियों के मुताबिक कैबिनेट सेक्रेटरी ने पहली सूची में जगह न बना पाए शहरों से नए सिरे से तैयारी करने के लिए कहा है। अप्रैल तक दोबारा स्मार्ट सिटी प्रपोजल सबमिट किया जा सकेगा। अगस्त माह में स्मार्ट सिटी की दूसरी सूची जारी की जाएगी।