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इंटरनेशनल कॉल गेटवे के जरिये ऑनलाइन फर्जीवाड़ा करने वाले छह बदमाश धरे गए, रखे थे 106 टेलीकॉलर

Wed, 13 Mar 2019 02:14 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 13 Mar 2019 02:14 AM IST
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Six Fraud Arrested who were falsifying online through the International Call Gateway in Delhi
Online Fraud

इंटरनेशनल कॉल गेटवे के जरिये विदेशियों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाने वाले छह बदमाशों को दिल्ली अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से सिम बॉक्स, 28 सिमकार्ड, 106 हार्ड डिस्क, 4 सर्वर, दो राउटर और सात लाख 40 हजार रुपये कैश बरामद किया है। इस रैकेट को दिल्ली के पीतमपुरा में संचालित किया जा रहा था और इस गैंग के लिए 106 टेलीकॉलर काम कर रहे थे। पुलिस ने एक सूचना के आधार पर आरोपियों को दबोचा है।

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अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव रंजन के मुताबिक, आरोपियों की पहचान केशवपुरम निवासी मोहित बंसल, पीतमपुरा निवासी यशवंत सिंह उर्फ यश (2018 में बॉडी बिल्डिंग में मिस्टर दिल्ली और मिस्टर हरियाणा), रोहिणी सेक्टर-3 निवासी उदित, हरि नगर दिल्ली निवासी गुरमान सिंह, हिमाचल के कांगड़ा निवासी रोहित और मणिपुर निवासी पीफोकरेनी के रूप में हुई है। मोहित इस गिरोह का सरगना है।
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उन्होंने बताया कि आरोपी कॉल सेंटर के जरिये विदेशियों के साथ ठगी करने के लिए इंटरनेशनल गेटवे को दरकिनार कर रहे थे। ये अनधिकृत आईएसपी से वीओआईपी मिनट खरीद रहे थे, जिससे सरकारी खजाने को भी भारी नुकसान हो रहा था। इन बदमाशों के द्वारा किए गए संभावित नुकसान का आकलन किया जा रहा है। बदमाशों ने संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों के लोगों के साथ ठगी की है।

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इस तरीके से काम कर रहे थे ये बदमाश...

पूछताछ में बदमाशों से पता लगा कि ग्राहकों की समस्या निवारण में मदद करने के लिए गूगल सर्च इंजन भुगतान सेवा लाइसेंस पर पंजीकरण करके अनोखे तरीके से ये बदमाश काम कर रहे थे। बदमाशों ने खोज परिणाम के शीर्ष स्थान पर रखकर अपनी उपस्थिति बढ़ाई थी, जिससे उनके जाल में फंसने वाले विदेशियों को उन पर यकीन हो जाता था। ये आरोपी खुद को गूगल, आईफोन और फेसबुक को टेक्निकल सपोर्ट देने के नाम पर लोगों को फंसाते थे।

इंटरनेशनल गेटवे के जरिये उपलब्ध करवाए गए नंबर पर पीड़ितों को इसलिए शक नहीं होता था क्योंकि गूगल सर्च में आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराया गया नंबर टॉप सर्च में शामिल होता था। इसके बाद जब ग्राहक दिए गए ग्राहक सेवा नंबर पर कॉल करता, तो विदेश में स्थित अपने बदमाशों को जाल में फंसने वाले लोगों की पूरी जानकारी भेज देते थे। इसके बाद कॉल सेंटर में काम करने वाले टेलीकॉलर और सुपरवाइजर के रूप में काम करने वाले बदमाश ग्राहक को गूगल प्ले कार्ड खरीदने का लालच देते थे और उनके तकनीकी मुद्दों को ठीक करने के बहाने बैंक खाता संख्या सहित अन्य विवरण ले लेते थे।

इसके बाद ग्राहक को दिए गए गूगल प्ले कार्ड का सुरक्षा कोड ब्लॉकर को दिया जाता था, जो उसे ऊंची दर पर बेचने का काम करता था। भारत या विदेश में कहीं से बैठकर खातों से पैसा निकालने के साथ प्ले कार्ड को बेचने के बाद चीन से ऑनलाइन भुगतान अवैध तरीकों से इन बदमाशों को भेजा जाता था। जब तक पीड़ितों को अपने खातों में हुई ठगी का पता लगता था, तब तक  ये गायब हो जाते थे।

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