फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   sert case of faridabad

फेल होना ही नहीं था तो क्यों भागे गुरुजी

Mon, 26 May 2014 10:52 PM IST
कुंदन तिवारी/अमर उजाला, फरीदाबाद
कुंदन तिवारी/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Mon, 26 May 2014 10:52 PM IST
विज्ञापन

राज्य शैक्षणिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान परिषद (एससीईआरटी) की योजना को जिस प्रकार से प्रदेश के जेबीटी शिक्षकों ने नकारा है, उससे बड़ा सवाल ये खड़ा हो गया है कि ऐसे में आखिरकार स्कूली शिक्षा में सुधार कैसे हो सकेगा, जबकि ट्रेनिंग नीड असेसमेंट (टीएनए) परीक्षा में किसी भी शिक्षक को फेल किया ही नहीं जाना था।

विज्ञापन


इस बात की पुष्टि एससीईआरटी की निदेशक स्नेहलता अहलावत ने अमर उजाला से फोन पर बातचीत में की है। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष शिक्षकों की ट्रेनिंग का आयोजन एससीईआरटी या जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) द्वारा किया जाता है।
विज्ञापन


इस प्रकार के प्रोफार्मा शिक्षकों से भरवाए जाते हैं, लेकिन तब कोई भी शिक्षक इसका विरोध नहीं करता है। इस बार बड़े स्तर पर सर्वेक्षण कराया जाना था। ऐसे में मैन पावर की कमी के कारण हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का सहयोग लिया गया, जिसमें शिक्षा निदेशालय की सहमति ली गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस सर्वेक्षण के लिए एससीईआरटी, डाइट व एनसीआरटी के सहयोग से प्रश्न पत्र तैयार कराया गया, जिसको एक प्रोफार्मा का रूप दिया गया। इस प्रोफार्मा के अंदर 50 प्रश्नों को शामिल किया गया।

इसमें कुछ बहुविकल्पीय, कुछ विषय से संबंधित व कुछ ज्ञान व बौद्धिक क्षमता से संबंधित प्रश्नों को शामिल किया गया, इससे यह पता लग जाता कि किस शिक्षक का रुझान किस ओर है। सर्वेक्षण के आधार पर अगर काबिल शिक्षक मिल जाते तो उन्हें एससीआरटी की ओर से रिसोर्स पर्सन की तरह इस्तेमाल किया जाना था। अगर वह शिक्षक औसत दर्जे का है तो उसे प्रशिक्षण दिया जाता।

क्यों हुआ टकराव
हरियाणा राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद ठाकरान ने बताया कि कोई भी सर्वेक्षण सैंपल के आधार पर होता है न कि परीक्षा के रूप में। इस बार परीक्षा केंद्र बने थे, रोल नंबर जारी हुए और बैठने का इंतजाम किया गया।

यह कुछ एनजीओ को फायदा पहुंचाने का सीधा प्रयास है। उनका कहना है कि इसमें शिक्षा फंड का खुलेआम दुरुपयोग शिक्षा विभाग की वित्तायुक्त सुरीना राजन की ओर से किया जा रहा है।


यह प्रदेश सरकार के लिए जांच का विषय है, क्योंकि पिछले दिनों तीसरी व पांचवीं कक्षा की परीक्षा भी इसी योजना के तहत कराई गई थी, जिसकी उत्तर पुस्तिकाओं के जलने की बात कही जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed