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Delhi: कर्मयोगी बनकर गंभीर हालात में खुद फैसला लेंगे पुलिसकर्मी, छवि ठीक होने के साथ ही आत्मविश्वास भी आएगा
Mon, 17 Jul 2023 09:22 AM IST
शाहरुख खान
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 17 Jul 2023 09:22 AM IST
सार
दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त एसके गौतम ने बताया कि पुलिसकर्मियों के संबंध में आम लोगों द्वारा बताई गई आम समस्याओं में से एक उनका व्यवहार है, जो जनता के पुलिस स्टेशनों में जाने से सावधान रहने का एक प्रमुख कारण है।
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सुनील कुमार गौतम , विशेष पुलिस आयुक्त
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी में धार्मिक जुलूस निकलते समय सांप्रदायिक तनाव की आशंका बनी रहती है। ऐसे में वहां पर तैनात पुलिसकर्मी भीड़ को तुरंत नियंत्रित करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। पुलिसकर्मी कर्मयोगी बनकर अधिकारियों के आदेश का इंतजार करने के बजाय हालात के मद्देनजर खुद फैसला लेंगे। वे देखेंगे कि स्थानीय लोगों की किस तरह सहायता की जाए।
कर्मयोगी अपने विवेक से ऐसे फैसले लेंगे ताकि सांप्रदायिक माहौल खराब न हो। इसी तरह कहीं अगर जबरदस्त जाम लग जाता है और वहां से कोई वीवीआईपी को निकलना हो तो वहां तैनात कर्मयोगी पुलिसकर्मी कैसे व्यवस्था संभालेगा, इसकी भी ट्रेनिंग दी जाएगी। इस सब परिस्थितियों में तुरंत निर्णय लेने के लिए दिल्ली पुलिसकर्मियों को कर्मयोगी बनाया जा रहा है। इसके लिए सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के 40 हजार पुलिसकर्मियों को कर्मयोगी बनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर दिल्ली पुलिस ने अपने कर्मियों के संचार कौशल को विकसित करने के लिए उनके बीच सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और जवानों को प्रभावी और संवेदनशील तरीके से जनता के साथ बेहतर संवाद करने में मदद करना है ताकि दिल्ली पुलिस की छवि सुधर सके। इसके लिए दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के क्षमता निर्माण कार्यक्रम मिशन कर्मयोगी से जुड़ गई है।
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दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त एसके गौतम ने बताया कि पुलिसकर्मियों के संबंध में आम लोगों द्वारा बताई गई आम समस्याओं में से एक उनका व्यवहार है, जो जनता के पुलिस स्टेशनों में जाने से सावधान रहने का एक प्रमुख कारण है। अधिकांश का कहना है कि पुलिस उनसे ठीक से बात नहीं करती है और ग्रामीण लोग यह भी शिकायत करते हैं कि उन्हें अभद्र भाषा का सामना करना पड़ता है। जनता के बीच इस आम धारणा को अच्छी तरह से जानते हुए, दिल्ली पुलिस ने अपने कर्मियों को सॉफ्ट स्किल्स प्रशिक्षण शुरू करके इसे बदलने की पहल की है।
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कर्मयोगी अपने विवेक से ऐसे फैसले लेंगे ताकि सांप्रदायिक माहौल खराब न हो। इसी तरह कहीं अगर जबरदस्त जाम लग जाता है और वहां से कोई वीवीआईपी को निकलना हो तो वहां तैनात कर्मयोगी पुलिसकर्मी कैसे व्यवस्था संभालेगा, इसकी भी ट्रेनिंग दी जाएगी। इस सब परिस्थितियों में तुरंत निर्णय लेने के लिए दिल्ली पुलिसकर्मियों को कर्मयोगी बनाया जा रहा है। इसके लिए सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के 40 हजार पुलिसकर्मियों को कर्मयोगी बनाया जा रहा है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर दिल्ली पुलिस ने अपने कर्मियों के संचार कौशल को विकसित करने के लिए उनके बीच सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और जवानों को प्रभावी और संवेदनशील तरीके से जनता के साथ बेहतर संवाद करने में मदद करना है ताकि दिल्ली पुलिस की छवि सुधर सके। इसके लिए दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के क्षमता निर्माण कार्यक्रम मिशन कर्मयोगी से जुड़ गई है।
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दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त एसके गौतम ने बताया कि पुलिसकर्मियों के संबंध में आम लोगों द्वारा बताई गई आम समस्याओं में से एक उनका व्यवहार है, जो जनता के पुलिस स्टेशनों में जाने से सावधान रहने का एक प्रमुख कारण है। अधिकांश का कहना है कि पुलिस उनसे ठीक से बात नहीं करती है और ग्रामीण लोग यह भी शिकायत करते हैं कि उन्हें अभद्र भाषा का सामना करना पड़ता है। जनता के बीच इस आम धारणा को अच्छी तरह से जानते हुए, दिल्ली पुलिस ने अपने कर्मियों को सॉफ्ट स्किल्स प्रशिक्षण शुरू करके इसे बदलने की पहल की है।
500 ट्रेनर दे रहे प्रशिक्षण
दिल्ली पुलिसकर्मियों को कर्मयोगी बनाने के लिए चयनित 500 मास्टर ट्रेनर ट्रेनिंग दे रहे हैं। ये 500 मास्टर ट्रेनर भी सब-इंस्पेक्टर व इंस्पेक्टर रेंक के पुलिस अधिकारी हैं। इन मास्टर ट्रेनर्स को मेसर्स इल्लुमाईन लैब्स के प्रोफेशनल्स द्वारा द्वारका में प्रशिक्षण दिया गया है। ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद अब ये मास्टर ट्रेनर आगे अपने-अपने जिले और यूनिट में अन्य पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
दिल्ली पुलिसकर्मियों को कर्मयोगी बनाने के लिए चयनित 500 मास्टर ट्रेनर ट्रेनिंग दे रहे हैं। ये 500 मास्टर ट्रेनर भी सब-इंस्पेक्टर व इंस्पेक्टर रेंक के पुलिस अधिकारी हैं। इन मास्टर ट्रेनर्स को मेसर्स इल्लुमाईन लैब्स के प्रोफेशनल्स द्वारा द्वारका में प्रशिक्षण दिया गया है। ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद अब ये मास्टर ट्रेनर आगे अपने-अपने जिले और यूनिट में अन्य पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
पुलिस और जनता के बीच बेहतर संवाद कायम हो और पुलिसकर्मियों को और अधिक पेशेवर बनाना इस कार्यक्रम का मकसद है। मिशन कर्मयोगी भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है। इसी के तहत दिल्ली पुलिस अपनी सेवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बनाने में जुटी है।
संवेदनशील और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए दिया जा रहा प्रशिक्षण : टीम में वरिष्ठ और विशेषज्ञ अधिकारी शामिल हैं। कार्यक्रम के तहत, पुलिसकर्मियों के संचार कौशल में सुधार करने और मदद के लिए नागरिकों की कॉल पर संवेदनशील और त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। उद्देश्य पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए सॉफ्ट स्किल में विशेषज्ञता वाले प्रशिक्षकों का पुल बनाना है। आयोग अधिकारियों को तकनीकी और पेशेवर सहायता प्रदान करेगा।
काफी बदलाव व आत्मविश्वास बढ़ रहा है
दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (एसपीयूडब्ल्यूएसी) सुनील कुमार गौतम ने बताया कि वह दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा के साथ प्रशिक्षण केंद्रों में गए थे। यहां पर देखा कि ट्रेनिंग लेने वाले पुलिसकर्मियों में आत्मविश्वास बढ़ा है। पुलिसकर्मी काफी कुछ सीख रहे हैं। उनके व्यवहार में बदलाव आ रहा और वह संवेदनशील बन रहे हैं। उनका कहना है कि जैसे की गृहमंत्रालय चाहता है दिल्ली पुलिस को अगले 10 वर्षों में एक मॉडल पुलिस बल बनाना है।
दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (एसपीयूडब्ल्यूएसी) सुनील कुमार गौतम ने बताया कि वह दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा के साथ प्रशिक्षण केंद्रों में गए थे। यहां पर देखा कि ट्रेनिंग लेने वाले पुलिसकर्मियों में आत्मविश्वास बढ़ा है। पुलिसकर्मी काफी कुछ सीख रहे हैं। उनके व्यवहार में बदलाव आ रहा और वह संवेदनशील बन रहे हैं। उनका कहना है कि जैसे की गृहमंत्रालय चाहता है दिल्ली पुलिस को अगले 10 वर्षों में एक मॉडल पुलिस बल बनाना है।
ये है मिशन कर्मयोगी
मिशन कर्मयोगी क्षमता निर्माण कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महत्वाकांक्षी प्रमुख परियोजना है। दिल्ली पुलिस को भी इससे जोड़ा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और जवानों को सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग प्रदान करना है। मिशन कर्मयोगी सिविल सेवा क्षमता निर्माण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीएससीबी) है। इसे 20 सितंबर, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य भारतीय नौकरशाही में सुधार करना और सिविल सेवकों को भविष्य के लिए तैयार करना है। कार्यक्रम का लक्ष्य कुशल सार्वजनिक सेवा वितरण के लिए व्यक्तिगत, संस्थागत और प्रक्रिया स्तरों पर क्षमता निर्माण तंत्र में व्यापक सुधार करना है।
मिशन कर्मयोगी क्षमता निर्माण कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महत्वाकांक्षी प्रमुख परियोजना है। दिल्ली पुलिस को भी इससे जोड़ा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और जवानों को सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग प्रदान करना है। मिशन कर्मयोगी सिविल सेवा क्षमता निर्माण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीएससीबी) है। इसे 20 सितंबर, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य भारतीय नौकरशाही में सुधार करना और सिविल सेवकों को भविष्य के लिए तैयार करना है। कार्यक्रम का लक्ष्य कुशल सार्वजनिक सेवा वितरण के लिए व्यक्तिगत, संस्थागत और प्रक्रिया स्तरों पर क्षमता निर्माण तंत्र में व्यापक सुधार करना है।