सीलिंग विवाद में फंसे मनोज तिवारी को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बीजेपी चाहे तो करे कार्रवाई
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पूर्वी दिल्ली के एक परिसर की सील तोड़ने के आरोप में अवमानना की कार्यवाही झेल रहे भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और लोकसभा सांसद मनोज तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मनोज तिवारी के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने से इंकार किया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि उन्हें मनोज तिवारी द्वारा अदालत का किसी तरह की अवमानना किए जाने का मामला नहीं दिख रहा है।
अदालत ने मनोज तिवारी के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला बीजेपी पर छोड़ते हुए कहा कि, इसमें कोई शक नहीं है कि भाजपा ने कानून को अपने हाथ में लिया है। हम मनोज तिवारी के रवैये से बहुत आहत हैं। एक चुने हुए प्रतिनिधि के तौर पर उन्हें जिम्मेदारी से काम करना चाहिए था न कि कानून को अपने हाथ में लेकर।
उच्चतम न्यायालय ने भाजपा सांसद मनोज तिवारी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई खत्म की, परिसरों पर लगी नगर निकाय की सील मनोज तिवारी द्वारा तोड़े जाने की निंदा भी की। न्यायालय ने कहा कि मनोज तिवारी ने अदालत से अधिकार प्राप्त समिति पर ओछे आरोप लगाए, यह दिखाता है कि वह कितना नीचे गिर सकते हैं। सीलिंग के मामले में न्यायालय ने कहा कि कानून हाथ में लेने के मनोज तिवारी के बर्ताव से वह बहुत आहत हैं।
Supreme Court left it to BJP to take actions against Manoj Tiwari and said, "There is no doubt that Tiwari has taken law in his hand. We are pained by the machismo&manner of Tiwari. As an elected representative he should have acted responsibly rather taking law in his own hands." https://t.co/KKTqzwiXlA
— ANI (@ANI) November 22, 2018
कोर्ट ने इस मामले में दलीलें सुनने के बाद 30 अक्तूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ को यह तय करना था कि तिवारी कोर्ट की अवमानना के दोषी हैं या नहीं।
पिछली सुनवाई के दौरान पीठ ने तिवारी से कहा था कि आप जनप्रतिनिधि है, जिम्मेदार नागरिक हैं। आखिर आपको सील तोड़ने की इजाजत किसने दी? अगर सीलिंग गलत की गई थी तो आपको संबंधित अथॉरिटी के पास जाना चाहिए था।’
पीठ ने कहा था कि हम भीड़ के कानून से नहीं चलते बल्कि रूल ऑफ लॉ से चलते हैं। वहीं सांसद का कहना था कि उन्होंने न तो अदालत और न ही अदालत द्वारा गठित निगरानी समिति की अवहेलना की है।
सुप्रीम कोर्ट ने समिति की रिपोर्ट पर 19 सितंबर को तिवारी को अवमानना का नोटिस जारी किया था। सनद रहे कि न्यायालय की अवमानना का दोषी पाए जाने पर अधिकतम छह महीने की कैद की सजा का प्रावधान है या जुर्माना या दोनों। जुर्माने की रकम अधिकतम 2,000 रुपये हो सकती है।