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सीलिंग विवाद में फंसे मनोज तिवारी को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बीजेपी चाहे तो करे कार्रवाई

Thu, 22 Nov 2018 07:29 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 22 Nov 2018 07:29 AM IST
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sealing case Supreme court verdict on manoj tiwari today

पूर्वी दिल्ली के एक परिसर की सील तोड़ने के आरोप में अवमानना की कार्यवाही झेल रहे भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और लोकसभा सांसद मनोज तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मनोज तिवारी के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने से इंकार किया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि उन्हें मनोज तिवारी द्वारा अदालत का किसी तरह की अवमानना किए जाने का मामला नहीं दिख रहा है।

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अदालत ने मनोज तिवारी के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला बीजेपी पर छोड़ते हुए कहा कि, इसमें कोई शक नहीं है कि भाजपा ने कानून को अपने हाथ में लिया है। हम मनोज तिवारी के रवैये से बहुत आहत हैं। एक चुने हुए प्रतिनिधि के तौर पर उन्हें जिम्मेदारी से काम करना चाहिए था न कि कानून को अपने हाथ में लेकर।
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उच्चतम न्यायालय ने भाजपा सांसद मनोज तिवारी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई खत्म की, परिसरों पर लगी नगर निकाय की सील मनोज तिवारी द्वारा तोड़े जाने की निंदा भी की। न्यायालय ने कहा कि मनोज तिवारी ने अदालत से अधिकार प्राप्त समिति पर ओछे आरोप लगाए, यह दिखाता है कि वह कितना नीचे गिर सकते हैं। सीलिंग के मामले में न्यायालय ने कहा कि कानून हाथ में लेने के मनोज तिवारी के बर्ताव से वह बहुत आहत हैं।
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कोर्ट ने इस मामले में दलीलें सुनने के बाद 30 अक्तूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ को यह तय करना था कि तिवारी कोर्ट की अवमानना के दोषी हैं या नहीं।

पिछली सुनवाई के दौरान पीठ ने तिवारी से कहा था कि आप जनप्रतिनिधि है, जिम्मेदार नागरिक हैं। आखिर आपको सील तोड़ने की इजाजत किसने दी? अगर सीलिंग गलत की गई थी तो आपको संबंधित अथॉरिटी के पास जाना चाहिए था।’

पीठ ने कहा था कि हम भीड़ के कानून से नहीं चलते बल्कि रूल ऑफ लॉ से चलते हैं। वहीं सांसद का कहना था कि उन्होंने न तो अदालत और न ही अदालत द्वारा गठित निगरानी समिति की अवहेलना की है। 

सुप्रीम कोर्ट ने समिति की रिपोर्ट पर 19 सितंबर को तिवारी को अवमानना का नोटिस जारी किया था। सनद रहे कि न्यायालय की अवमानना का दोषी पाए जाने पर अधिकतम छह महीने की कैद की सजा का प्रावधान है या जुर्माना या दोनों। जुर्माने की रकम अधिकतम 2,000 रुपये हो सकती है।  

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