स्कूली बच्चों से भरी एक मिनी बस बुधवार सुबह शशि चौक पर अनियंत्रित होकर पलट गई। बस में सेक्टर-28 स्थित विश्व भारती स्कूल केबच्चे और दो शिक्षिकाएं सवार थीं। हादसे में किसी को गंभीर चोट नहीं आई है। हालांकि बस इतनी बुरी तरह से पलटी थी कि आसपास से गुजर रहे लोग भी डर गए। लोगों ने स्कूल बस के शीशे तोड़कर छात्रों को बाहर निकाला। सूचना पाकर मौके पर पहुंची थाना सेक्टर-39 पुलिस ने बस को कब्जे में लेकर चालक को हिरासत में ले लिया है।
बच्चों से भरी बस पलटी, लोगों ने बस के शीशे तोड़कर छात्रों को बाहर निकाला
ऑटो को बचाने के चक्कर में पलटी बस
थाना सेक्टर-39 प्रभारी निरीक्षक अवनीश दीक्षित ने बताया कि विश्वभारती स्कूल के छात्रों को ले जा रही निजी बस सेक्टर-122 से आ रही थी। शशि चौक के पास बस सेक्टर-28 विश्वभारती स्कूल जाने के लिए मुड़ रही थी। बस चालक के अनुसार मुड़ते वक्त अचानक से एक ऑटो उसकी बस केसामने आ गया और उसे तेजी से ब्रेक लगाना पड़ गया। मोड़ पर अचानक ब्रेक लगने से बस अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में बस में सवार बच्चों और शिक्षिकाओं किसी को गंभीर चोट नहीं आई है। बस को कब्जे में लेकर चालक को हिरासत में लिया गया है।
एआरटीओ विभाग करेगा हादसे की जांच
बुधवार शाम तक किसी ने बस चालक के खिलाफ शिकायत नहीं दी है। लिहाजा मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं है। पुलिस हादसे की रिपोर्ट एआरटीओ विभाग को भेजेगी। एआरटीओ विभाग हादसे की जांच करेगा। साथ ही यह भी जांच करेगा कि स्कूली बच्चों को लेकर जा रही बस मानकों के अनुसार थी या नहीं।
स्कूल की नहीं है बस
वहीं हादसे के बाद विश्व भारती स्कूल की प्रिंसिपल रश्मि काकरू ने बताया कि हादसे का शिकार होने वाली बस स्कूल की नहीं है। अभिभावकों ने खुद निजी बस को बच्चों को लाने-ले जाने के लिए लगाया है। हादसे की सूचना मिलते ही स्कूल का स्टॉफ भी तुरंत मौके पर पहुंचा और बच्चों को दूसरी बस से भेजा गया।
छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं निजी स्कूल प्रबंधन
शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूलने वाले निजी स्कूल छात्रों की सुरक्षा को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है। गुरुग्राम के रेयान स्कूल में हुई प्रद्युम्न हत्याकांड जैसे मामलों के बाद भी स्कूल प्रबंधन की लापरवाही जारी है। ऐसे में अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने के लिए अमूमन स्कूल प्रबंधन निजी वाहनों का इस्तेमाल करता है। ज्यादातर स्कूलों के पास पर्याप्त बसें नहीं हैं। ऐसे में अभिभावकों को मजबूरी में निजी स्कूली वैन और निजी बस का सहारा लेना पड़ता है।