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33 साल बाद भी प्लॉट नहीं, गिनीज बुक के लिए मुहिम
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 25 Apr 2014 03:25 PM IST
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दिल्ली के रोहिणी हाउसिंग स्कीम को अब वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की मुहिम शुरू की गई है। इसके लिए लंदन स्थित कार्यालय में पत्र लिखकर यह बताया गया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण ने दिल्ली के हजारों परिवार को 33 साल बाद भी विकसित प्लॉट देने में विफल हुआ है। इसको लेकर पिछले दिनों आर्मी के एक पूर्व कैप्टन ने स्पीड पोस्ट से अपना वीरता पदक लौटा दिया था।
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डीडीए की लापरवाही को अदालत तक पहुंचाने वाले एडवोकेट राहुल गुप्ता का कहना है कि प्राधिकरण ने आज से 33 साल पहले हजारों लोगों से यह वादा किया था कि उन्हें प्लॉट दिया जाएगा।
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लंबी लड़ाई के बाद पिछले साल डीडीए ने प्लॉट तो दिए, लेकिन वहां अभी भी किसान हल चला रहे है। वहां न तो रोड है और न ही रिहायश विकसित करने के लिए मूलभूत सुविधा। प्राधिकरण की लापरवाही का पर्दाफाश करने के लिए यह मुहिम शुरू की है। गुप्ता का दावा है कि पत्र स्वीकार कर लिया गया है, क्योंकि पावती मिल गई। लिहाजा एजेंसी ने वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल करने की कवायद शुरू कर दी है।
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गौरतलब है कि डीडीए ने 25 अप्रैल 1981 में रोहिणी हाउसिंग स्कीम लॉन्च किया था। इसके तहत 82,366 लोगों ने आवेदन किया। इनमें 25,300 लोगों को रोहिणी में प्लॉट देने का वादा किया, लेकिन भूमि विवाद के कारण मामला कोर्ट में पहुंचा। पिछले साल डीडीए ने कोर्ट के आदेश के बाद प्लॉट तो दिया, लेकिन यह इलाका विकसित नहीं है।