नोएडा में 10 फीसदी महंगी हुई रिहायशी जमीन
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नोएडा प्राधिकरण ने आवासीय और ग्रुप हाउसिंग भूखंडों की दरों में दस फीसदी और औद्योगिक भूखंडों की दरों में 7.5 फीसदी वृद्धि कर दी है।
संस्थागत की दरों में भी औसतन दस फीसदी की वृद्धि की गई है। हालांकि वीआईपी सेक्टरों में स्थित वाणिज्यक भूखंडों की श्रेणी बदलने से दरें कम हो गई हैं।
सोमवार को हुई 182 वीं बोर्ड बैठक में नई दरों पर मुहर लग गई है।
वाणिज्यिक भूखंडों की दरें हुई कम
प्राधिकरण ने आवासीय सेक्टरों में स्थित व्यावसायिक भूखंडों की दरों में सीधे तौर पर कोई फेरबदल नहीं किया है, लेकिन श्रेणी बदलने से एक दर्जन सेक्टरों में स्थित व्यावसायिक भूखंडों की आवंटन दरें कम हो गई हैं।
अब तक सेक्टर 15, 15ए, 16, 16ए, 16बी, 25ए, 32, 41, 44, 50 और 51 ए श्रेणी में थे। इनको अब बी श्रेणी में शामिल कर दिया गया है। जिसके चलते यहां स्थित 100 वर्ग मीटर तक वाणिज्यिक भूखंडों की दरें 4.45 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के बजाय 3.15 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गई है।
इन सेक्टरों में स्थित बड़े आकार के वाणिज्यक भूखंडों की दरें भी बी श्रेणी की दरों के हिसाब से होगा। वहीं, सी श्रेणी के सेक्टर 45 को बी श्रेणी में शामिल कर देने से कीमत बढ़ गई है। इस हिसाब से 100 वर्ग मीटर तक के भूखंड की कीमत 2.87 से बढ़कर 3.15 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गई है।
यूपी अपार्टमेंट एक्ट लागू
बिल्डरों पर लगाम कसने के लिए बना यूपी अपार्टमेंट ऐक्ट 2010 नोएडा में लागू हो गया। सोमवार को बोर्ड बैठक में नोएडा प्राधिकरण ने इसकी नियमावली को मंजूरी दे दी है।
प्राधिकरण के सीईओ व चेयरमैन ने बताया कि अब बिल्डर लेआउट प्लान में फेरबदल करने, निवेशक के फ्लैट का फ्लोर बदलने व एफएआर बढ़ाने से पहले उसमें पैसा लगा चुके बायर्स की सहमति लेंगे।
कुछ मामलों में आधे से ज्यादा तो कुछ में दो तिहाई सहमति जरूरी होगी। बिल्डर प्रोजेक्ट का नक्शा पास कराने के साथ ही डिक्लेरेशन फॉर्म जमा करेंगे, जिसमें प्रोजेक्ट से जुड़े सभी विवरण होंगे।
रुकेगी बिल्डर्स की मनमानी
बिल्डर को बायर्स के साथ ऐग्रीमेंट में निर्माण शुरू करने से लेकर पजेशन तक का चरणबद्ध तरीके से तिथिवार विवरण देना होगा। ओपन और कॉमन एरिया का स्पष्ट विवरण होगा। साथ ही पजेशन के बाद तय समयावधि में सोसायटी के सभी अधिकार आरडब्ल्यूए को ट्रांसफर करने होंगे।
चेयरमैन ने बताया कि अपार्टमेंट ऐक्ट को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जल्द ही नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। सीईओ खुद इसके नोडल अफसर होंगे। इसके अन्य सदस्यों की जल्द ही नियुक्ति की जाएगी। यह नियामक प्राधिकरण बिल्डरों से ऐक्ट की सभी शर्तों का पालन कराएगा।
बता दें, कि नोएडा में 50 से अधिक बिल्डरों के सैकड़ों हाउसिंग प्रोजेक्ट बन रहे हैं। इनके फ्लैटों में हजारों लोगों ने पैसा लगा रखा है। अब तक बिल्डरों पर सिर्फ प्राधिकरण के लीज की शर्तें ही लागू होती हैं, जिसमें जमीन, निर्माण और भुगतान की शर्तें तो थीं, लेकिन बिल्डरों से फ्लैट खरीदने वाले आम लोगों के हितों से जुड़ी शर्तों का कोई खास जिक्र नहीं होता है। इस कारण बिल्डर मनमानी तरीके से बायर्स के साथ पेश आते हैं।
एक्ट की प्रमुख शर्तें:-
- फ्लैट बुक कराने पर बिल्डर व खरीदार के बीच ऐग्रीमेंट होगा अनिवार्य। बिल्डर के गड़बड़ी करने पर रेगुलेटरी अथॉरिटी में शिकायत कर सकेंगे।
- ऐग्रीमेंट में फ्लैट का कवर्ड एरिया, सुपर एरिया, फैसिलिटी, सभी का विस्तृत उल्लेख रहेगा, जिससे बिल्डर फ्लैटों के निर्माण के दौरान गड़बड़ी नहीं कर सकेंगे।
- बिल्डरों को नींव रखने से लेकर पजेशन तक के क्रमवार निर्माण का ब्योरा देना होगा। पेमेंट का पूरा प्लान इसमें लिखा होगा। इससे बिल्डर तय समय पर पजेशन देने को बाध्य हो जाएगा।
- खरीदारों को पजेशन देने से पहले रजिस्ट्री करानी होगी। मौजूदा समय में बिल्डर पजेशन तो देते हैं, मगर प्राधिकरण का ड्यूज क्लियर न कर पाने से लंबे समय तक रजिस्ट्री नहीं करते, जिससे लोगों को मालिकाना हक नहीं मिल पाता।
- पजेशन देने के बाद बिल्डरों को सोसायटी के मेंटेनेंस का अधिकार वहां की रेजीडेंस वेलफेयर एसोसिएशन को ट्रांसफर करना होगा।
- ऐग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन करने पर रेगुलेटरी अथॉरिटी को बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार होगा। लीज कैंसल कर जमीन वापस लेने तक की कार्रवाई हो सकती है।
दरों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
-वेयर हाउसिंग व बांस बल्ली मार्केट के लिए उस सेक्टर के वाणिज्यक दर का 50 फीसदी लगेगा।
-सेक्टर एक, 16ए और 24 में आईटी भूख्रंड का आधार मूल्य 37500 रुपये प्रति वर्ग मीटर होगी।
-सॉफ्टवेयर, सर्विस, ऑडियो व वीडियो फिल्म स्टूडियों के लिए फेज दो, तीन और एक्सप्रेसवे पर स्थित भूखंडों की दरें 13550 रुपये प्रति वर्ग मीटर होगी।
-आईटी पार्क के लिए फेज दो व तीन में 10240 रुपये प्रति वर्ग मीटर।
-कॉलेज, प्राइमरी व नर्सरी स्कूल के लिए संस्थागत सेक्टर होने पर संस्थागत दरें और आवासीय सेक्टर होने पर आवासीय दरों की आधी कीमत देनी पड़ेगी।
-सरकारी अस्पताल, डाकघर, विद्युत सबस्टेशन, दूध, सब्जी व फल वितरण केंद्र की कीमत 7300 रुपये प्रति वर्ग मीटर होगी।
-कृषि की फॉर्म हाउस की दरें 5525 रुपये प्रति वर्ग मीटर होगी।