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एक अगस्त से बढ़ेगा रैपिड मेट्रो का किराया

Wed, 16 Jul 2014 05:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Wed, 16 Jul 2014 05:09 PM IST
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Rapid metro fair to hike from 1st august

महंगाई के दौर में एक झटका अब रेपिड मेट्रो देने की तैयारी में है। इसने बुधवार को सरकार से मंजूरी मिलने के एक बैठक में किराया बढ़ाने का नीतिगत फैसला ले लिया है।

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किराया कितना बढ़ेगा, इसपर अभी फैसला नहीं हुआ है। बताया गया कि किराया 12 से 23 रुपये के बीच रखा जा सकता है। रैपिड मेट्रो यात्रियों को एक अगस्त से बढ़ा किराया देना होगा।
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रैपिड मेट्रो का कहना है कि मौजूदा दर कंपनी का ऑफर किराया है। तकरीबन आठ महीना पहले शुरू हुई रैपिड मेट्रो और अब में काफी अंतर है। शुरुआत में जहां इसके केवल पांच स्टेशन थे। बढ़कर अब छह हो गए हैं। फिर भी उम्मीद से कम यात्री इसके सफर को तरजीह देते हैं। इससे कंपनी को जबर्दस्त घाटना उठाना पड़ रहा है।
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रैपिड मेट्रो के प्रवक्ता ने बताया कि तकरीबन एक पखवाड़े पहले मौजूदा स्थिति से अवगत कराते हुए प्रदेश सरकार से किराया बढ़ाने की अनुमति मांगी गई थी। नियमत: प्राइवेट मेट्रो ट्रेन कंपनियां लांचिंग किराया तो खुद तय करती हैं, पर किराया बढ़ाने के लिए उसे संबंधित प्रदेश सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है।

इसी क्रम में रेपिट मेट्रो को घाटे में दिखाते हुए कंपनी ने हुडा सरकार से किराया बढ़ाने की अनुमति मांगी थी। प्रवक्ता कहना है कि बुधवार को सरकार की ओर से 12 से 23 रुपये के बीच किराया बढ़ाने की अनुमति मिल गई है, पर अब तक तय नहीं हो पाया है कि एक अगस्त से वास्तव में किराया कितना होगा।

अभी रैपिड मेट्रो का फ्लैट किराया 12 रुपये है। किराया बढ़ाने के लिए ही बुधवार को रैपिड मेट्रो के अधिकारियों की बैठक हुई, पर इसमें यह तो तय हो गया कि एक अगस्त से बढ़ा किराया वसूला जाएगा, पर कितना? इसपर अभी फैसला नहीं हो पाया है। प्रवक्ता ने बताया कि अगले तीन दिनों के भीतर इसपर फैसला लिया जा सकता है।


घाटा दर घाटा
तकरीबन आठ महीने पूर्व जब देश की पहली प्राइवेट मेट्रो शुरू की गई थी तब कंपनी का अनुमान था कि इसके माध्यम से रोजाना करीब डेढ़ लाख लोग यात्रा करेंगे। फुटफॉल बढ़ाने के लिए रैपिड मेट्रो स्टेशन से द्वारका तक बस भी चलाई गई। इसके अलावा कॉरपोरेट कंपनियों में काम करने वाल कर्मियों को भी सहुलियतें दी गईं, लेकिन इसका लाभ नहीं हुआ। अब तक मात्र 35 हजार यात्रियों का ही औसत है। यही नहीं कॉरपोरेट कंपनियों के इंप्लाई में भी इसे खास पसंद नहीं किया जा रहा है। इससे होने वाले घाटे से उबरने के लिए ही कंपनी किराया बढ़ाने को लेकर सरकार के पास गई थी।

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