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रेप जघन्य अपराध, ऐसे मामलों में सजा रद्द नहीं हो सकती: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 26 Apr 2014 07:24 PM IST
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दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग से रेप के दो मामलों में दोषियों को राहत प्रदान करे से इंकार कर दिया। अदालत ने कहा कि रेप जघन्य अपराध है। इसमें लिप्त दोषियों की सजा रद्द करने का कोई औचित्य नहीं है। इसके बाद अदालत ने दोषियों की अपील खारिज करते हुए उन्हें जेल भेज दिया।
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न्यायमूर्ति इंद्रमीत कौर के समक्ष पेश मामले में दोषी रणजीत मलिक को 12 वर्षीय बच्ची से रेप में 10 वर्ष कैद की सजा सुनाई गई थी। उसने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए फर्जी मामले में फंसाने का तर्क रखा।
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अदालत ने उसकी अपील खारिज करते हुए कहा कि तथ्यों से स्पष्ट है, पीड़िता के पिता की मौत हो चुकी है और उसकी मां काम करके गुजारा चलाती है। दोषी ने 19 मार्च 2000 को उसे घर में अकेला पाकर कमरे में टीवी दिखाने के नाम पर बुलाया व रेप किया। वह बच्ची के पिता के समान था लेकिन उसने विश्वास को तोड़ा था। ऐसे में उसे किसी भी प्रकार से राहत प्रदान करना उचित नहीं होगा। अदालत ने उसकी जमानत रद्द करके शेष सजा पूरी करने के लिए जेल भेज दिया।
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नौ वर्ष की बच्ची से रेप में सजा बरकरार
अन्य मामले में न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने नीरज (23) को मिली सात वर्ष कैद को रद्द करने से इंकार कर दिया। अदालत ने बचाव पक्ष के उस तर्क को खारिज कर दिया कि डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार, उनका मुवक्किल सेक्स के योग्य नहीं है। इसके अलावा शिकायत दो दिन बाद दर्ज करवाई गई।
अदालत ने कहा कि डॉक्टर की रिपोर्ट में संभावना जताई गई कि वह संभोग करने योग्य नहीं है। डॉक्टर की रिपोर्ट स्पष्ट नहीं है, लेकिन अन्य साक्ष्यों से रेप की पुष्टि होती है। इसके अलावा शिकायत दो दिन बाद इस कारण दर्ज करवाई गई कि पीड़िता का पिता घर पर नहीं था।
पीड़िता दोषी की बहन से ट्यूशन लेती थी। सात जनवरी 2010 को दोषी ने उसे घर में अकेला देखकर रेप किया। निचली अदालत ने उसे 3 अगस्त 2012 को सात वर्ष कैद की सजा सुनाई थी।