पढ़िए, दिल्ली रेप के आरोपी की पुरानी करतूतों की कहानी
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दिल्ली में कैब में युवती से रेप करने का आरोपी ड्राइवर पहले भी रेप कर चुका है। मामले में उसे सात महीने की जेल हो भी हो चुकी है। हालांकि सबूतों के अभाव में उसे जेल से रिहा कर दिया गया था।
टीओआई के मुताबिक आरोपी शिवकुमार यादव पर साल 2011 में दिल्ली के महारौली थाने में रेप का मामला दर्ज कराया गया था। तब शुरुआती जांच के बाद तिहाड़ जेल भेज दिया गया। लेकिन बाद में उसके खिलाफ सबूत न मिलने पर उसे रिहा कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक उस कांड की फाइल दोबारा खोली जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने आरोपी चालक पर दिल्ली में और भी मामले दर्ज होने की आशंका जताई है। असल में यह रेप आरोपी कोई सामान्य अपराधी नहीं है। इसके और भी कई कारनामे हैं, जिनके राज खुलने अभी बाकी हैं।
स्कूल प्रिंसपल का बेटा है रेप आरोपी
शिवकुमार यादव किसी ऐरे-गैरे घर से नहीं, बल्कि एक गांव के संपन्न घराने से वह है। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी स्थित रामनगर गांव में उसके पिता गांव में ही रामनाथ परिषदीय स्कूल के प्रिंसपल थे।
मामले पर ग्रामीणों का कहना है कि वह बचपन से ही आवारा है। उसने गांव में हाईस्कूल तक ही पढ़ाई की, लेकिन उतने ही दिनों में उसकी आदतों से पूरा गांव परेशान हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी शिवकुमार को बचपन से ही शराब का लत लग गई थी। वह रोज गांववालों और घरवालों संग मारपीट और झगड़ा करता था। इससे आजिज आकर उसके पिता ने उसे स्विफ्ट डिजायर गाड़ी खरीदी और कमाने-खाने के लिए दिल्ली भेज दिया।
शिवकुमार यादव तीन भाई हैं। जिनमें वह दूसरे नंबर पर है। लेकिन छोटा भाई मंदबुद्धि है और बड़े कुंवरपाल कुछ सालों पहले मौत हो गई। इसके बाद शिवकुमार का घर में प्रभुत्व बढ़ गया।
भाई की पत्नी को बना लिया अपनी पत्नी
बड़े भाई कुंवरपाल की मौत के बाद शिवकुमार उसकी विधवा को लेकर दिल्ली चला आया और उसके साथ रहने लगा। यहां महिला को दो बेटियां हुई, जबकि कुंवरपाल से उसे एक बेटा था।
लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि अब उस महिला का भी कुछ अता-पता नहीं है। सूत्रों के मुताबिक शिवकुमार उसके साथ भी मारपीट करता था। इस बीच जब वह 2011 में रेप के आरोप में जेल गया तो वह महिला कहीं चली गई।
शिवकुमार के गांव वालों की मानें तो उसकी भाइयों और पिता से कभी नहीं पटी। फिलहाल अक्सर तीन-चार माह में घर आने वाला शिवकुमार करीब दो साल से गांव नहीं आया। 76 वर्षीय पिता रामनाथ और मां धर्मदेवी रविवार को घर में नहीं थे।