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फेसबुक ने बिछड़े बेटे को मां से मिलवाया

Thu, 13 Mar 2014 04:08 AM IST
निशा ठाकुर/अमर उजाला, गाजियाबाद
निशा ठाकुर/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Thu, 13 Mar 2014 04:08 AM IST
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Son got his mother through facebook profile update

पढ़ाई का दबाव से नौ वर्षीय मासूम राज घर छोड़कर भाग निकला। किस्मत अच्छी थी और वह अच्छे लोगों को मिल गया। एक सामाजिक संस्था के लोगों ने उसके बताए गए पते के साथ प्रोफाइल को फेसबुक पर अपडेट किया तो राज दोबारा अपनी मां से मिल गया।

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परिवार वालों से मिलने के बाद राज की यह कहानी सामने आई। परिजन इस बात से हैरत में हैं कि महज पढ़ाई करने के डर से राज ऐसा फैसला कर सकता है।

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कानपुर के अनिल सिंह और सीमा सिंह का इकलौता बेटा राज चिरंजीव विहार में अपने ताऊ बीबी सिंह के पास पिछले एक साल से रह रहा था। डीपीएसजी में कक्षा तीन में पढ़ने वाला राज इससे पहले कानपुर के एक सामान्य स्कूल से दूसरी कक्षा में पढ़ता था। डीपीएसजी में अंग्रेजी में पढ़ाई करना उसे भारी पड़ रहा था।
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इस तनाव से छुटकारा पाने के लिए वह परिजनों को बिना बताए पुराने दोस्तों के पास कानपुर जाने के लिए निकल पड़ा। कानपुर जाने से पहले उसने अपने दोस्तों को कोल्ड-ड्रिंक की पार्टी भी दी। इसके बाद वह पैदल ही रात आठ बजे के करीब रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया। राज ने बताया कि उसने ट्रेन के लिए जीआरपी वालों से पूछा तो उन्होंने पूछताछ की।

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जीआरपी वालों ने राहुल को चाइल्ड लाइन को सुपुर्द किया। सात मार्च को ही रात साढ़े दस बजे उसे प्रेरणा बाल संस्थान में भेजा गया। यहां पर वह छह दिनों से रह रहा है। उसके परिजनों का कहना है कि चाइल्ड लाइन में सुनवाई के दौरान भी राज ने कानपुर जाने की ही बात कही है।

छुपाया गाजियाबाद का पता, फेसबुक से मिला।

प्रेरणा बाल संस्थान के संस्थापक आचार्य तरुण ने बताया कि राहुल से बात करने पर उसने गाजियाबाद की बजाय कानपुर का पता बताया। राज के बताए गए पते के साथ उसकी फोटो फेसबुक पर अपलोड की गई। नौ मार्च को ही फेसबुक के जरिए किसी फ्रेंड ने राज के बताए गए आधे-अधूरे पते को सुधारा। सही पता निकलने पर जब कानपुर पुलिस से संपर्क किया गया तो राज के पिता से बात हुई।

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क्या कहते हैं समाजशास्त्री
बच्चों में समय से पहले मैच्योरिटी आ रही है। ऐसे में बच्चों को छोटी उम्र में ही लगने लगता है कि वह बहुत बड़ा और समझदार हो गया है। वह बाहर ही अपने निजी संबंध कायम करता है। पुराने माहौल और संबंधों से लगाव के कारण और नई जगह अपना सर्किल न बनने की वजह से ये पुराने माहौल में लौटना चाहते हैं। बच्चे का लगाव अपने परिवार से कम रहा होगा, ऐसे में उसने घर छोड़ने का फैसला किया।

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