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दलालों के चंगुल में रेलवे आरक्षण केंद्र

Mon, 28 Apr 2014 02:34 PM IST
Updated Mon, 28 Apr 2014 02:34 PM IST
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Railway reservation centre under brokers control

तत्काल टिकटों से दलालों की पहुंच को दूर रखने का रेलवे बेशक दावा करे। लेकिन लोकल स्तर पर विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से लोगों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं।

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दलाल, आरक्षणकर्मी एवं आरपीएफ की सांठगांठ से यहां पूरा खेल धड़ल्ले से चल रहा है। दिल्ली से फरीदाबाद सेक्शन के बीच ओल्ड स्टेशन, बल्लभगढ़ एवं पलवल के आरक्षण केंद्र आज भी दलालों के कब्जे से मुक्त नहीं हो पाए हैं।
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टिकटों के लिए आम जनता को इतना परेशान होना पड़ता है कि लोग एक बार तो यहां आने से पहले सोचते ही हैं पर मजबूरी उन्हें ले ही आती है। पेश इसी संबंध में हमारी स्पेशल रिपोर्ट।
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आरक्षण की लाइन में होते हैं दलालों के गुर्गे

Railway reservation centre under brokers control

फरीदाबाद स्टेशन पर टिकट आरक्षण के लिए चार काउंटर बनाए गए हैं। सुबह 10 बजे से दोपहर12 बजे तक होने वाली तत्काल बुकिंग के लिए सुबह 5:00 बजे से ही काउंटरों पर दलालों के गुर्गों का कब्जा हो जाता है।

यात्रियों से तत्काल टिकट के लिए किराये से पांच सौ रुपये अतिरिक्त लेकर उन्हें टिकट उपलब्ध कराते हैं।

कहने को तो रेलकर्मी तत्काल आरक्षण के फार्म पर नंबरिंग करते हैं लेकिन नंबरिंग 1 से 10 तक नहीं बल्कि 11 नंबर से शुरू होती है।

दलालों के आगे किसी को नहीं मिलता टिकट

Railway reservation centre under brokers control

कांउटर नंबर-5 पर बैठने वाले रेलकर्मी की मिलीभगत से तत्काल टिकट का पूरा खेल चलता है। रविवार सुबह 5 बजे से ही लाइन में लगे सेक्टर-19 निवासी नीभा सिंह भागलपुर के लिए टिकट लेने के लिए काउंटर पर आकर खड़ी हो गई थी।

उन्हें फॉर्म पर 19 नंबर दे दिया गया लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। पिछले दो दिन से पिता के कोमा में होने की सूचना पाकर धनबाद जाने के लिए तत्काल टिकट कटाने आईं 23वें नंबर पर पहुंचीं रूबी झा को भी टिकट नसीब नहीं हुआ।

इनका साफ कहना था कि दलालों के कब्जे के कारण उन्हें टिकट नहीं मिल पाया। कुछ इसी तरह की कहानी पटना जाने वाले शंकर शर्मा, प्रेम कुमार, सीवान के विजय एवं कुशीनगर के यात्री प्रेम ने बताई। उक्त लोग सुबह 4 बजे से लाइन में लगे थे।

आरपीएफ की वीडियोग्राफी योजना ठंडे बस्ते में

Railway reservation centre under brokers control

पिछले वर्ष टिकट दलालों को लेकर दिल्ली में मचे हो-हल्ला के बीच रेलवे सुरक्षा बल(आरपीएफ) ने तत्काल आरक्षण के समय वीडियोग्राफी शुरू की थी।

लेकिन समय बीतने के साथ वह भी ठंडे बस्ते में चला गई। अब न तो वीडियोग्राफी होती है और न ही किसी जवान की तैनाती।

रविवार को ओल्ड स्टेशन पर अमर उजाला टीम की मौजूदगी की भनक मिलते ही 10:30 बजे आरपीएफ के 3 जवान कांउटर पर पहुंचे। तब तक दलालों का काम हो चुका था। ऐसे में वर्दी वालों ने एक-दो लोगों को धमका कर खानापूर्ति कर ली।

बैक डोर से चलता है खेल

Railway reservation centre under brokers control

काउंटर पर सक्रिय दलाल बैक डोर से पूरा खेल चलाते हैं। 4-5 की संख्या में दलाल 10-10 फॉर्म लेकर एकसाथ पीछे के रास्ते आरक्षण केंद्र पर जाते हैं और अंदर बैठे आरक्षण इंचार्ज को हाथ में पकड़ा कर चले जाते हैं।

आरक्षण करने वाला कर्मचारी काउंटर के सामने लगे यात्रियों के टिकट के बीच में ही दलालों का टिकट बनाते हैं। सूत्रों की मानें तो पर टिकट सौ रुपये आरक्षण इंचार्ज की जेब में जाता है। खुद कांउटर पर लगे लोग दलालों के इस खेल को बखूबी देखते रहते है।

इस पर जब हमने निजामुद्दीन के डिप्टी कमांडेंट आरपीएफ, चंद्रशेखर से पूछा तो उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनाव के कारण अभी मैनपावर की कमी हो गई है। अभी 7-8 दिन यह समस्या बनी रहेगी। फिर भी हम पूरी कोशिश करेंगे कि तत्काल आरक्षण के समय आरपीएफ के जवान वहां मौजूद रहें। चुनाव ड्यूटी से वापस आने पर फिर से वीडियोग्राफी शुरू कराई जाएगी।

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