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दिल्ली में रेबीज से बचने के लिए कुत्तों से रहें दूर, महज दो अस्पतालों में इंजेक्शन उपलब्ध
Tue, 05 Mar 2019 03:19 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Tue, 05 Mar 2019 03:19 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : डेमो फोटो
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यदि दिल्ली में रेबीज से बचना है तो कुत्तों व बंदरों से दूर रहना होगा। क्योंकि यदि कुत्ते या बंदर ने काट लिया तो सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं मिलेगा। दरअसल, इन अस्पतालों में रेबीज से बचाव के लिए इंजेक्शन ही उपलब्ध नहीं है। दिल्ली में बंदर व कुत्तों के काटने से करीब 700 से अधिक मरीज प्रतिदिन अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। जबकि दिल्ली सरकार के दो ही अस्पतालों में इंजेक्शन उपलब्ध हैं। जबकि अन्य अस्पतालों में रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। क्योंकि दिल्ली सरकार की ओर से इंजेक्शन की सप्लाई नहीं हो पा रही है।
दिल्ली में कुल चार अस्पताल सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया, गुरु तेग बहादुर और लोकनायक अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध हैं। इनमें से सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया केंद्र सरकार और गुरु तेग बहादुर और लोकनायक अस्पताल दिल्ली सरकार के अधीनस्थ हैं। इन चार अस्पतालों में बेशक इंजेक्शन उपलब्ध हैं, लेकिन मरीजों की संख्या स्टॉक से बेहद ज्यादा है।
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, लोकनायक अस्पताल की बात करें तो यहां पहले एनिमल बाइट के रोजाना 100 से 150 मरीज आते थे। लेकिन जब से सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन की सप्लाई ठप हुई है, तब से यहां रोजाना औसतन 300 मरीज आ रहे हैं।
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दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से यहां भी इंजेक्शन की सप्लाई नहीं की जा रही है, बल्कि अस्पताल इंजेक्शन अपने खर्चे पर बाहर से खरीद रहा है। वहीं, पूर्वी दिल्ली के सबसे बड़े गुरु तेग बहादुर साहिब अस्पताल में रेबीज इंजेक्शन के लिए रोजाना 500 मरीज पहुंच रहे हैं। जबकि पहले यह आंकड़ा 150 से 200 था।
उधर, केंद्र सरकार के सफदरजंग और आरएमएल अस्पताल में सबसे अधिक मरीजों की लाइन देखी जा सकती है। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों से मरीजों को केंद्र सरकार के बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
सफदरजंग अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक, यहां प्रतिदिन रेबीज इंजेक्शन के लिए आने वालों की संख्या 700 तक पहुंच गई है। क्योंकि सभी अस्पताल यहीं पर लोगों को रेफर कर रहे हैं। उधर, आरएमएल अस्पताल में भी रोजाना 500 मरीज रेबीज के इंजेक्शन के लिए आ रहे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में रेबीज इंजेक्शन का स्टॉक कम है।
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दिल्ली में कुल चार अस्पताल सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया, गुरु तेग बहादुर और लोकनायक अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध हैं। इनमें से सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया केंद्र सरकार और गुरु तेग बहादुर और लोकनायक अस्पताल दिल्ली सरकार के अधीनस्थ हैं। इन चार अस्पतालों में बेशक इंजेक्शन उपलब्ध हैं, लेकिन मरीजों की संख्या स्टॉक से बेहद ज्यादा है।
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दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, लोकनायक अस्पताल की बात करें तो यहां पहले एनिमल बाइट के रोजाना 100 से 150 मरीज आते थे। लेकिन जब से सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन की सप्लाई ठप हुई है, तब से यहां रोजाना औसतन 300 मरीज आ रहे हैं।
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दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से यहां भी इंजेक्शन की सप्लाई नहीं की जा रही है, बल्कि अस्पताल इंजेक्शन अपने खर्चे पर बाहर से खरीद रहा है। वहीं, पूर्वी दिल्ली के सबसे बड़े गुरु तेग बहादुर साहिब अस्पताल में रेबीज इंजेक्शन के लिए रोजाना 500 मरीज पहुंच रहे हैं। जबकि पहले यह आंकड़ा 150 से 200 था।
उधर, केंद्र सरकार के सफदरजंग और आरएमएल अस्पताल में सबसे अधिक मरीजों की लाइन देखी जा सकती है। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों से मरीजों को केंद्र सरकार के बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
सफदरजंग अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक, यहां प्रतिदिन रेबीज इंजेक्शन के लिए आने वालों की संख्या 700 तक पहुंच गई है। क्योंकि सभी अस्पताल यहीं पर लोगों को रेफर कर रहे हैं। उधर, आरएमएल अस्पताल में भी रोजाना 500 मरीज रेबीज के इंजेक्शन के लिए आ रहे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में रेबीज इंजेक्शन का स्टॉक कम है।
जल्द नई कंपनी को दिया जाएगा टेंडर
''इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी एक साथ इतने इंजेक्शन का निर्माण नहीं कर पा रही है। इसलिए अस्पतालों में इंजेक्शन पहुंचाने में समस्या आ रही है। हम नई कंपनी को टेंडर देने पर विचार कर रहे हैं जो पर्याप्त स्टॉक बना सके और अस्पतालों में निरंतर इंजेक्शन की सप्लाई कर सके। जल्द ही यह टेंडर दिया जाएगा।''
- डॉ़ अशोक कुमार, डीजीएचएस।
सरकार नहीं अस्पताल खुद बाहर से खरीद रहा इंजेक्शन
''अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन्स की प्राइवेट खरीद की जा रही है क्योंकि सरकार की तरफ से अस्पताल में इंजेक्शन नहीं पहुंच रहे हैं। पिछले कुछ महीनों से अस्पताल में रेबीज इंजेक्शन वाले मरीज की संख्या काफी बढ़ गई है। इस वक्त यहां रोजाना 300 से 400 मरीज इंजेक्शन लगवाने आ रहे हैं।''
- डॉ अरविंद मोहन, एनिमल बाइट क्लीनिक, लोकनायक अस्पताल
इंजेक्शन का पर्याप्त स्टॉक
''हमारे यहां इंजेक्शन का पर्याप्त स्टॉक है और चूंकि यहां नया एंटी रेबीज क्लीनिक खुला है, इस वजह से भी हम स्टॉक की कमी नहीं होने दे रहे। यहां मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। यहां रोजाना 400 से 500 मरीज रेबीज इंजेक्शन के लिए आ रहे हैं।''
- डॉ भरत सागर, जीटीबी अस्पताल
- डॉ़ अशोक कुमार, डीजीएचएस।
सरकार नहीं अस्पताल खुद बाहर से खरीद रहा इंजेक्शन
''अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन्स की प्राइवेट खरीद की जा रही है क्योंकि सरकार की तरफ से अस्पताल में इंजेक्शन नहीं पहुंच रहे हैं। पिछले कुछ महीनों से अस्पताल में रेबीज इंजेक्शन वाले मरीज की संख्या काफी बढ़ गई है। इस वक्त यहां रोजाना 300 से 400 मरीज इंजेक्शन लगवाने आ रहे हैं।''
- डॉ अरविंद मोहन, एनिमल बाइट क्लीनिक, लोकनायक अस्पताल
इंजेक्शन का पर्याप्त स्टॉक
''हमारे यहां इंजेक्शन का पर्याप्त स्टॉक है और चूंकि यहां नया एंटी रेबीज क्लीनिक खुला है, इस वजह से भी हम स्टॉक की कमी नहीं होने दे रहे। यहां मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। यहां रोजाना 400 से 500 मरीज रेबीज इंजेक्शन के लिए आ रहे हैं।''
- डॉ भरत सागर, जीटीबी अस्पताल