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इन 5 कारणों से थम गई साइबर सिटी की रफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Wed, 27 Aug 2014 09:12 PM IST
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गुड़गांव में मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी परेशानी हो या फिर हाउस टैक्स का मुद्दा। प्रशासन से नाराज शहर की जनता तपती गर्मी में सड़क पर उतर आई। श्रमिक संगठन से लेकर कर्मचारियों ने अपनी नौकरी को लेकर अधिकारियों के कार्यालय के बाहर दस्तक दी।
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कई घंटों तक चले प्रदर्शन के दौर से लगा पूरा शहर सड़क पर उतर आया है। बुधवार को शहर पर निकले जलसा-जुलूस के चलते वाहनों की रफ्तार पर भी ब्रेक सा लग गया, जिसके बाद प्रशासन के प्रतिनिधियों ने जनता के बीच पहुंच उनकी समस्याओं का जल्द निपटारा करने का आश्वासन दिया।
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1- लामबंद नजर आए सफाईकर्मी
नगर निगम से अनुबंधित 142 सफाईकर्मियों को नियमित करने के मुद्दे पर बुधवार को निगम कमिश्नर कार्यालय के सामने सफाईकर्मियों ने प्रदर्शन किया। सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने निगम कमिश्नर के खिलाफ नारेबाजी की। गुस्साए सफाईकर्मियों के बीच रोड पर प्रदर्शन के चलते रास्ता जाम हो गया। करीब एक घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद संयुक्त निगमायुक्त अनु श्योकंद ने उन्हें जल्द ही पक्का करने का आश्वासन दिया। कर्मचारी संघ के जिला प्रधान राम सिंह ने बताया कि सफाईकर्मियों के नियमितीकरण को लेकर प्रशासन का रुख अच्छा नहीं है।
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2- सुविधाओं की खातिर बहाया पसीना
साइबरसिटी की पॉश सोसायटी में पिछले कई सालों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जूझ रहे रिहायशी लोगों का गुस्सा भी बुधवार को उबल पड़ा। कई अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी सोसायटी में बिजली की मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे रिहायशियों ने लघु सचिवालय में प्रदर्शन किया। सोसायटी के लोगों ने बताया कि करोड़ों के फ्लैट को अब तक बिजली से भी महरूम रखा गया है। सोसायटी में चार हजार परिवार के पीड़ित परिवार के लोगों की सुविधाओं को प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। रिहायशी लोगों ने एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा।
3- वेंडर भी हुए आक्रोशित
बंधवाड़ी कचरा निस्तारण प्लांट के निगम के अधीनस्थ जोन तीन और चार में लगाए गए 16 वेंडरों को लाइसेंस देने के मुद्दे पर बुधवार को फिर प्रदर्शन हुआ। वेंडरों ने निगम कमिशभनर कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन उनके साथ भेदभाव भरा व्यवहार कर रहा है, जिसके चलते उनके अधीनस्थ साढ़े तीन हजार कर्मचारियों का करियर दांव पर लगा हुआ है। इस संबंध में निगम अधिकारियों को बार-बार लिखे जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जल्द ही वे निगमायुक्त से मुलाकात कर अपनी मांग रखेंगे।
4- हीरो मोटो कॉर्प का मामला गरमाया
बहुप्रतिष्ठित दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी हीरो मोटो कॉर्प में 11 अगस्त को कंपनी प्रबंधन की तरफ से बिना नोटिस दिए निकाले गए 500 ठेकाकर्मियों की बहाली को बुधवार को लघु सचिवालय ने कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। कंपनी प्रबंधन के रुख को मनमानी करार देते हुए कर्मचारियों ने बहाली की मांग की।
सैकड़ों की तादाद में लघु सचिवालय परिसर में कर्मचारियों के प्रदर्शन के बाद अतिरिक्त श्रम आयुक्त सर्कल-एक की मध्यस्थता में कंपनी प्रबंधन के साथ मीटिंग की गई। लेकिन कंपनी प्रबंधन के अड़ियल रवैये के चलते वार्ता विफल रही। बर्खास्त श्रमिक महेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशासन भी कंपनी प्रबंधन का समर्थन कर रहा है लिहाजा उनके लिए रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
5- हाउस टैक्स के विरोध में सांकेतिक प्रदर्शन
निगम दायरे में प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर सामने आ रहे झमेले को लेकर बुधवार को फिर लोगों ने एकजुट होते हुए प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। वार्ड नंबर-10 पार्षद मंगतराम बागड़ी के नेतृत्व में लोग निगम कमिश्नर कार्यालय के सामने इकट्ठा हुए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
लोगों ने बताया कि सरकार द्वारा 2008-09 व 2009-10 का रिहायशी टैक्स माफ किया गया था तो उसे गलत तरीके से अब क्यों वसूला जा रहा है? क्या किसी अन्य नगर निगम या नगरपालिका में ऐसी पॉलिसी है कि माफ किया गया टैक्स वसूला जा रहा हो? नगर निगम द्वारा 2008-09 में करोड़ों खर्च कर डाटा तैयार किया गया। वह भी गलत नियमों पर गलत आंकलन करते हुए रिकार्ड सर्वे कंपनी द्वारा तैयार किया गया। इसके कारण बिल भेजे के बाद उनके गलत होने से संबंधित करीब 70 हजार से अधिक लोगों के ऑब्जेक्शन आए, इसे अब तक दूर किए बिना नोटिस भेजे जा रहे हैं।