23 साल से वो कर रही है कन्यादान का इंतजार
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श्रमिकों की बेटी को उसके विवाह में आर्थिक मदद के लिए हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड की ओर से 2002 में शुरू की गई। इस योजना का लाभ सही लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
शहर में ऐसे हजारों श्रमिक हैं, जो अस्थायी रूप से एक ही कंपनी में सालों से काम कर रहे हैं। उनका मासिक वेतन छह हजार से ज्यादा नहीं है। उन्हें नगद में वेतन मिलता है। उनका कोई फंड नहीं कटता। उनके पास कोई कागजी सबूत नहीं होता कि वह बोर्ड में उसे जमा कर उसका लाभ उठा सके।
केस-1
न्यू तिलपत कॉलोनी के एक मकान में अनीता नौकरानी है। उसका पति रिक्शा चलाता है। उनकी तीन बेटियां और एक बेटा हैं। जुलाई 2014 में उन्होंने अपनी दो बेटियों की शादी 70 हजार रुपये कर्ज लेकर की थी। पिछले 23 साल से एक ही कोठी में काम कर रही नौकरानी अनीता को न तो मालिक की ओर से कोई सहयोग मिला और न ही सरकार की कन्यादान योजना का लाभ।
न कोई सैलरी स्लिप और न कोई कार्ड
केस-2
न्यू निलपत कॉलोनी के ही रामानंद की बेटी रेनू की शादी 8 फरवरी 2015 को है, लेकिन वह भी कन्यादान योजना का लाभ नहीं उठा सकेगा। क्योंकि यह पिछले 10 साल से एक ही संस्थान में काम तो कर रहा है, लेकिन कोई फंड नहीं कटता।
वेतन नगद में मिलता है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए इनके पास न तो कोई सैलरी स्लिप है और न ही कोई ईएसआई कार्ड।
केस-3
त्रिलोक रेवा कंपनी में अस्थाई श्रमिक था। वहां सात साल काम करने के बाद जुलाई 2014 में निकाल दिया गया। उसका वेलफेयर फंड तो कटता था, लेकिन कंपनी से निकालने के बाद ग्रेच्यूटी, बोनस और छुट्टियों का पैसा भी नहीं मिला।
वह अपनी बेटी के लिए वर तलाश रहा है और इसी साल शादी करने की तैयारी में है, लेकिन इनके पास लगातार पांच साल में एक ही संस्था में काम करने का कोई सबूत नहीं है। इस वजह से इन्हें भी सरकार की ओर से कोई आर्थिक मदद नहीं मिल पाएगी।
क्या है कन्यादान योजना
कामगारों की लड़कियों या संबंधित संस्था में कार्यरत महिला की शादी पर आर्थिक मदद के रूप में 51,000 की राशि तय की गई। इसका लाभ वह श्रमिक उठा सकता है, जिसका मासिक वेतन 20,000 से कम हो और किसी संस्था में पिछले पांच साल से लगातार काम कर रहा हो।
इसके साथ ही श्रमिक की पूर्ण सेवा काल में उसकी केवल दो लड़कियों के विवाह तक ही दिया जाएगा। इसके लिए उनके पास ईएसआई कार्ड, सेलरी स्लिप और मासिक वेलफेयर फंड कटना जरूरी है।
हरियाणा श्रमिक कल्याण बोर्ड की ओर से कन्यादान योजना का लाभ केवल उन्हीं श्रमिकों कोे मिलता है, जिनका वेलफेयर फंड कटता है। इसमें कर्मचारी का प्रतिमाह 10 रुपये और संस्था का 20 रुपये वेलफेयर फंड कटता है।
शशि बाला, वेलफेयर अधिकारी, श्रमिक कल्याण बोर्ड