इन 30 हजार लोगों को कब मिलेगा फ्लैट?
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नोएडा के 23 ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के करीब 30 हजार फ्लैट के आवंटियों को मालिकाना हक नहीं मिल पा रहा। प्राधिकरण से कंपलीशन न मिलने के कारण ये समस्या हुई है।
ओखला बर्ड सेंचुरी के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) से रोक के चलते प्राधिकरण से कंपलीशन जारी नहीं हो रहा।
एनजीटी में चल रहे मामले के चलते ओखला पक्षी विहार के आसपास दस किलोमीटर के दायरे में आने वाले प्रोजेक्टों का कंपलीशन सार्टिफिकेट जारी नहीं हो रहा, रोक को करीब छह माह बीत चुके हैं।
450 करोड़ रुपये का स्टांप भी अटका
उधर, 23 हाउसिंग प्रोजेक्ट बनकर तैयार, जिनमें करीब 30 हजार फ्लैट बने हैं। जब तक कंपलीशन नहीं मिल जाता, तब तक बिल्डर तैयार हो चुके फ्लैटों को भी खरीदारों के नाम ट्रांसफर नहीं कर सकते।
जब तक रजिस्ट्री नहीं हो जाती, तब तक कानूनी तौर पर फ्लैट खरीदारों को मालिक नहीं माना जा सकता। इन बिल्डरों ने कंपलीशन के लिए प्राधिकरण में आवेदन कर रखा है।
रजिस्ट्री विभाग के मुताबिक इन फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं होने से 450 करोड़ रुपये का स्टांप भी अटका हुआ है।
26 को होगी सुनवाई
ओखला बर्ड सेंचुरी के आसपास सौ मीटर के दायरे को ही ईको सेंसिटव जोन घोषित कराने के लिए नोएडा प्राधिकरण और वन विभाग प्रयासरत हैं। इस संबंध में एनजीटी को रिपोर्ट दे दी गई है। दिल्ली की तरफ से यही रिपोर्ट आना बाकी है।
इस मामले में ट्रिब्युनल ने 26 मार्च की तारीख तय की है। एनजीटी में बर्ड सेंचुरी से दस किलोमीटर के दायरे को ईको सेंसिटव जोन घोषित करने की याचिका दायर की गई है।
ग्रुप हाउसिंग फ्लैटों के प्रभावित सेक्टर
सेक्टर 45, 107, 78, 77, 76, 120, 34 , 121 46, 50, 52 110, 128, 129, 131, 133, 134, 96, 97 व 98। इनके अलावा व्यावसायिक व संस्थागत प्रतिष्ठान भी रोक से प्रभावित हैं। सेक्टर 18, 44, 16, 62, 127, 132, 94, 16ए, 135, 73, 96, 105 व 125 में बने तमाम प्रोजेक्ट इस आदेश के दायरे में आते हैं।