एक अगस्त से बढ़ जाएगी गर्भवती महिलाओं की मुसीबत
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सेक्टर-10 स्थित सामान्य अस्पताल में एक अगस्त से गर्भवती महिलाओं को इलाज कराना मुसीबत से कम नहीं होगा।
ऑपरेशन थियेटर व डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सेवा दे रहे दो निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों ने एक साथ हाथ खींच लिए हैं और जिला स्वास्थ्य विभाग को सूचना देते हुए एक अगस्त से सेवा बंद करने का निर्णय लिया है।
बता दें कि गर्भवती महिलाओं को सुविधा देते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों से टाइअप किया था। इसके बदले प्रति मरीज 150 रुपये देने का करार हुआ था, लेकिन अब अल्ट्रासाउंड केंद्रों का कहना है कि इससे नुकसान हो रहा है और आगे सेवा नहीं दे पाएंगे।
अल्ट्रासाउंड केंद्र बाजार दर से आधी कीमत पर सेवा देने के लिए तैयार हैं। कुल दर का 50 फीसदी मरीजों से और 50 फीसदी सरकार से लिया जाएगा, लेकिन इसके लिए स्वास्थ्य विभाग तैयार नहीं दिख रहा।
सिविल लाइन के सामान्य अस्पताल से सेक्टर-10 के सामान्य अस्पताल में गायनी वार्ड को शिफ्ट करने की प्रक्रिया की वजह से प्रसूति व गर्भवती महिलाओं के लिए मुसीबत बनी हुई है।
सेक्टर-10 अस्पताल में अल्ट्रासाउंड केंद्र बंद होने के बाद यहां आने वाले मरीजों को भी सिविल लाइन अस्पताल भेजा जाएगा। जिससे गर्भवती महिलाओं की मुसीबत और बढ़ेगी।
एक दिन में अल्ट्रासाउंड संभव नहीं
सेक्टर-10 अस्पताल में रोजाना औसतन 30 मरीजों का अल्ट्रासाउंड होता है और सिविल लाइन अस्पताल में 50-60 मरीजों का होता है। एक मरीज के लिए कम से कम 10 मिनट का समय चाहिए।
100 मरीजों के लिए कम से कम दस घंटे से अधिक का समय चाहिए, लेकिन सिविल अस्पताल में छह घंटे ही सेवा मौजूद होती है। ऐसे में मरीजों का अगले दिन ही अल्ट्रासाउंड हो पाएगा।
अल्ट्रासाउंड केंद्रों को आगे सेवा जारी रखने को कहा जा रहा है। जल्द ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी की जाएगी।
-डॉ. पुष्पा बिशभनोई, सिविल सर्जन